स्थिर विद्युतिकी क्या होती है? कैसे यह आकाशीय बिजली का निर्माण करती है ?

स्थिर विद्युतिकी क्या होती है? कैसे यह आकाशीय बिजली का निर्माण करती है ?

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इस आर्टिकल में; आप यह जान पायेंगे कि, आकाशीय बिजली का निर्माण किस प्रकार होता है ? बिजली ; हमेशा, धनात्मक आवेश से ऋणात्मक आवेश के बीच गति करती है. तो आकाश में; धनात्मक और ऋणात्मक आवेश, कैसे बनते हैं ? क्या पानी इसकी वजह है; या फिर कोई और ! आइये जानते हैं –

आकाशीय बिजली कैसे बनती है?

बिजली; हमेशा आवेश के कारण, उत्पन्न होती है. आपने टॉर्च का सेल तो देखा ही होगा! उस सेल में ऊपर; (+) चिन्ह बना होता है, जिसे धानात्मक टर्मिनल कहते हैं. और सेल के निचे (-) बना होता है; उसे, ऋणात्मक टर्मिनल कहते हैं.

आवेश एक आकर्षण बल होता है. जो ऊर्जा (जिसे हम बिजली कहते हैं) को; (+) से (-) की ओर, ले जाता है. इसी आवेश के कारण जब बिजली (ऊर्जा) गति करती है. मतलब; जब बिजली, किसी तार में, एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाती है, तो इसे ही विद्द्युत धारा कहते हैं. 

विद्द्युत धारा ; हमेशा सुचालक (Conductor) वस्तुओं में ही , गति कर सकती है. कुचालक (Non Conductor) में नहीं. परन्तु ; कुचालक (Non Conductor) वस्तुओं में बिजली को , स्थिर (Static)अवस्था में रखा जा सकता है. इसे ही स्थिर विद्द्युतिकी  (Static Electricity) कहते हैं.

आकाश में बनी बिजली इसी सिद्धांत पे काम करती है.

स्थिर विद्युतिकी क्या होती है ?

आकाशीय बिजली को जानने से पहले ; आइये जानते हैं, स्थिर विद्युतिकी के बारे में –

मुझे यकीन है कि आप सभी ने बचपन में कुछ महान अविष्कार किये होंगे.  

  • पटरी को बालों पर रगड़कर उसे कागज के टुकड़ों से चिपकाने की कोशिश की होगी.  
  • या फिर कुर्सी पर बैठकर पांव को हवा में रखना. और यदि; पीछे से कुर्सी पर, कपड़े से मारे. तो कुर्सी पर बैठे हुए व्यक्ति को करंट लगता है. याद आया 😎

इन दोनों ही घटनाओं में स्थिर विद्द्युतिकी (Static Electricity) का सिद्धांत कार्य करता है.  होता क्या है —

किसी भी वस्तु का; सबसे छोटा कण, परमाणु कहलाता है. इस परमाणु के केंद्र में; प्रोटोन होते हैं, जिन पर, धनात्मक आवेश  (+) होता है. जबकि; उनके बाहर, इलेक्ट्रान होते हैं, जिन पर ऋणात्मक आवेश (-) होता है. इलेक्ट्रान; सबसे बाहरी कक्षा में, खुले में घूमते हैं. 

जब हम; दो वस्तुओं को, आपस में रगड़ते हैं. तो इसमें; एक वस्तु के परमाणु में से इलेक्ट्रान, दूसरे वस्तु के परमाणु में प्रवेश कर जाते हैं. 

वस्तुओं में इलेक्ट्रान और प्रोटोन का आदान प्रदान

वस्तुओं में इलेक्ट्रान और प्रोटोन का आदान प्रदान इस प्रकार होता है –

जिस वस्तु से इलेक्ट्रान (-) निकलते हैं; उस वस्तु में इलेक्ट्रान की कमी के कारण, प्रोटोन के धनात्मक आवेश (+), ज्यादा हो जाते हैं.

और

जो वस्तु इलेक्ट्रान (-) ले रहा है, उसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रान (-) के कारण ऋणात्मक आवेश (-) ज्यादा होता है.

तो जब हम; पटरी को बालों पर रगड़ते हैं. तो पटरी के परमाणु से; इलेक्ट्रान (-), बालों में प्रवेश कर जाते हैं। और; पटरी में धनात्मक आवेश (+), अधिक हो जाता है. यही कारण है कि; जब हम इस “धनात्मक आवेशित (+) पटरी को “, कागज के टुकड़े की ओर ले जाते हैं. तो ; कागज के परमाणु के बाहर, ऋणात्मक (-) आवेश होने के कारण, कागज के टुकड़े, पटरी पर चिपक जाते हैं. 

आपको बता दूँ कि

  • (+) हमेशा (-) की ओर ही आकर्षित होगा.
  • यह आवेश कुछ समय तक ही रहता है. यह स्थिर आवेश; सुचालक (Conductor) वस्तुओं में, स्थिर नहीं रह पाता. क्यूंकि; उनमें आवेश, गतिशील हो जायेगा. इसीलिए ; यह प्रयोग, लोहे की पटरी या छड़ी के साथ नहीं हो पायेगा.

स्थिर विद्युतिकी; बादलों में, कैसे काम करती है?

आकाशीय बिजली के निर्माण से पहले; हम यह जानते हैं कि; बादलों का निर्माण कैसे होता है.

बादलों का निर्माण कैसे होता है

धरती की सतह पर; हवा जब गर्म होती है, तो वह हल्की होकर, ऊपर उठती है. ऊपर वायुमंडल में पहुंचकर; संघनन की प्रक्रिया शुरू होती है. जिसमें गर्म हवा के अन्दर मौजूद गुप्त ऊष्मा, बाहर निकल जाती है. और; जलवाष्प, पानी की छोटी छोटी बूंदों के रूप में, आद्रता ग्राही नाभिक के कणों के चारों ओर, जमा होने लगते हैं. इन्ही से बादल बनते हैं.

आद्रता ग्राही नाभिक में जैसे नमक के कण, हवा में निलंबित कण शामिल होते हैं. जिनके चारों ओर पानी की बूंदे जमनी लगती हैं.

परन्तु; नीचे से आने वाली गर्म हवा, इन बादलों को और अधिक ऊंचाई पे पहुंचा देते हैं. जहाँ इनके अंदर मौजूद; जल के कण, बर्फ में बदल जाते हैं.  

बस; यही बर्फ के कण, आपस में टकराकर, एक दूसरे में इलेक्ट्रॉनों का आदान प्रदान करते रहते हैं. जिससे; बादलों के अंदर कुछ भाग (+) आवेश वाला होता है और कुछ भाग (-) आवेश वाला होता है।    Clear

“बादलों के बीच (+) और (-) आवेश”

इसमें (+) आवेश हल्का होता है. अतः ; (+) आवेश वाला बादल, ऊपर रहता है. जबकि ; (-) आवेश भारी होने के कारण, नीचे रहता है.

ऊपर वायुमंडल गतिशील रहता है. इस कारण; जब (+) आवेश वाला बादल, (-) आवेश वाले बादल से टकराता है, तो बिजली बनती है. यह वही बिजली है; जिसे हम, आकाश में देखते हैं. 

इस बिजली में; वायु में उपस्थित नमी, सुचालक (Conductor) की भूमिका निभाती है. जिस कारण; यह बिजली, कई किमी लम्बाई तक चली जाती है. 

तो देखा आपने. आकाश में बिजली किस प्रकार बनती है? परन्तु मुझे पता है कि आपके मन में अभी भी बहुत से सवाल हैं. जैसे — 

बिजली बनने के बाद आवाज क्यों आती है?

यह एक आश्चर्यजनक घटना है कि; आकाशीय बिजली बनने के बाद, आवाज क्यों आती है ?

वास्तव में; बादलों के अंदर (+) या (-) आवेश को, ग्रहण करने की एक निश्चित क्षमता होती है. जब; इस क्षमता से अधिक आवेश, बादलों के अंदर इक्कठा होता है. तो बादल; अस्थिर होने लगते हैं और अपने अंदर के पूरे आवेश को, एक साथ बाहर निकाल लेते हैं. इसी प्रक्रिया में; बिजली के दौरान, विस्फोट की आवाज आती है.  

आकाशीय बिजली; बिना सहारे, जमीन पर कैसे गिरती है?

दरअसल आकाशीय बिजली की घटना तब घटती है, जब कपासी बादल आते हैं. 

कपासी बादल; बहुत घने होते हैं, और धरती की सतह के काफी करीब होते हैं. चूँकि; बादलों के निचले भाग में (-) आवेश होता है, और जब यह सतह के काफी करीब पहुँचते हैं. तो यह; धरती के (+) आवेश की ओर, आकर्षित हो जाते हैं.

इसीलिए; ऊँची बिल्डिंग, ऊँचे पेड़, ऊँचे टॉवर पर बिजली सबसे पहले गिरती है. क्यूंकि; ये उन बादलों के, काफी करीब होते हैं. 

  • बादलों में बनने वाली इन बिजलियों का तापमान; 27 हजार से 30 हजार डिग्री सेल्सियस होता है. जो कि; सूर्य की सतह से, 4 से 5 गुना अधिक होता है.
  • इस आकाशीय बिजली के बारे में; पहले से पता नहीं कर सकते हैं, क्यूंकि इनका पता, इनके बनने से कुछ सेकंड पहले ही चल पाता है. 

निष्कर्ष

दोस्तों! इस ब्लॉग में; आकाशीय बिजली के सन्दर्भ में, भौतिकी के तकनीकी शब्दावलियों का, काफी प्रयोग किया गया है. जिस कारण; इसको पड़ने और समझने में, थोड़ी बहुत दिक्कत हुई होगी. लेकिन; मुझे पूरा यकीं है कि, इस ब्लॉग के माध्यम से, आपको कई नवीन जानकारियां प्राप्त हुई होंगी.

Top FAQ for आकाशीय बिजली

बिजली कैसे बनती है?

बिजली; हमेशा आवेश के कारण, उत्पन्न होती है. जैसे सेल में ऊपर; (+) चिन्ह बना होता है, जिसे धानात्मक टर्मिनल कहते हैं. और सेल के निचे (-) बना होता है; उसे, ऋणात्मक टर्मिनल कहते हैं. आवेश एक आकर्षण बल होता है. जो ऊर्जा (जिसे हम बिजली कहते हैं) को; (+) से (-) की ओर, ले जाता है. इसी आवेश के कारण जब बिजली (ऊर्जा) गति करती है.

आकाशीय बिजली किस सिद्धांत पर काम करती है?

आकाशीय बिजली स्थिर विद्युतिकी के सिद्धांत पर काम करती है.

स्थिर विद्युतिकी का सिद्धांत क्या है?

इस में इलेक्ट्रान और प्रोटोन का आदान प्रदान होता रहता है –
जिस वस्तु से इलेक्ट्रान (-) निकलते हैं; उस वस्तु में इलेक्ट्रान की कमी के कारण, प्रोटोन के धनात्मक आवेश (+), ज्यादा हो जाते हैं.
और
जो वस्तु इलेक्ट्रान (-) ले रहा है, उसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रान (-) के कारण ऋणात्मक आवेश (-) ज्यादा होता है.

क्या बादलों में भी स्थिर विद्युतिकी का सिद्धांत काम करता है?

धरती की सतह से; गर्म हवा, ऊपर वायुमंडल में पहुंचती है. ऊपर पहुंचकर; संघनन की प्रक्रिया से, बादल बनते हैं. परन्तु; नीचे से आने वाली गर्म हवा, इन बादलों को और अधिक ऊंचाई पे पहुंचा देते हैं. जहाँ इनके अंदर मौजूद; जल के कण, बर्फ में बदल जाते हैं.  
बस; यही बर्फ के कण, आपस में टकराकर, एक दूसरे में इलेक्ट्रॉनों का आदान प्रदान करते रहते हैं. जिससे; बादलों के अंदर कुछ भाग (+) आवेश वाला होता है और कुछ भाग (-) आवेश वाला होता है।    

आशा है; आपको इस आर्टिकल से जरुर कोई नवीन जानकारी मिली होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे, तो Please नीचे comment करके बताये. और इसे अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें. ताकि उन्हें भी यह नवीन जानकारी मिल सके.

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आकाशीय बिजली कैसे बनती है?
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आकाशीय बिजली कैसे बनती है?
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आकाशीय बिजली का निर्माण स्थिर विद्युतिकी के कारण होता है. जब हम; दो वस्तुओं को, आपस में रगड़ते हैं. तो इसमें; एक वस्तु के परमाणु में से इलेक्ट्रान, दूसरे वस्तु के परमाणु में प्रवेश कर जाते हैं. वस्तुओं में आवेश का आदान प्रदान इस प्रकार होता है- जिस वस्तु से इलेक्ट्रान (-) निकलते हैं; उस वस्तु में इलेक्ट्रान की कमी के कारण, प्रोटोन के धनात्मक आवेश (+), ज्यादा हो जाते हैं. और जो वस्तु इलेक्ट्रान (-) ले रहा है, उसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रान (-) के कारण ऋणात्मक आवेश (-) ज्यादा होता है. इस प्रकार; वस्तुओं में जब धनात्मक आवेश, ऋणात्मक आवेश के साथ टकराता है, तो बिजली बनती है.
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This Post Has One Comment

  1. Dr. Naikhari

    Wow. so nice sir… Thanks for sharing this valuable information.

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