काफल में कौन से तत्व पाए जाते हैं. काफल को खाने से क्या लाभ और हानियाँ होती हैं?

काफल में कौन से तत्व पाए जाते हैं. काफल को खाने से क्या लाभ और हानियाँ होती हैं?

Hits: 294

काफ़ल पाक्यो ; मिन नि चाख्यो ” अर्थात “काफल पक गए हैं; मैंने नहीं चखे हैं ?” गढ़वाल (उत्तराखंड) में यह कहावत इन दिनों काफी प्रचलित रहती है.

क्योंकि; यही समय होता है, काफल के पकने का.

मुझे उम्मीद है कि; आप सभी ने काफल जरुर खाए होंगे, और अगर नहीं भी खाए होंगे, तो देखे तो जरुर होंगे.

वैसे कुछ लोगों का तो; ये भी मानना है कि, काफल में खाने लायक होता ही क्या है? जब तक चबाना शुरू करते हैं, बीज आ जाते हैं.

लेकिन दोस्तों; मुझे यकीन है कि, आज इस आर्टिकल को पदने के बाद, आपको कई ऐसी नयी जानकारी मिलेगी, जिसके बारे में आपको पता नहीं रहा होगा.

क्या आपको पता है कि; काफल आपका सिर दर्द मिनटों में गायब कर देगा. पेट में कब्ज की शिकायत हो या आँखों में जलन, काफल में सभी का इलाज़ करने की क्षमता है.

आइये जानते हैं, काफल के गुणकारी तत्वों के बारे में. यह शरीर की किन बीमारियों को दूर कर सकता है.

इसके साथ ही हम काफल से जुड़ी गढ़वाल की विख्यात कहानी के बारे में भी जानेंगे. कैसे काफल के कारण एक बेटी ने अपने प्राण त्यागे ? और कैसे उसके वियोग में उसकी माँ ने? आइये विस्तार से जानते हैं.

काफल : वानस्पतिक नाम और इसका उच्चारण

काफल का वानस्पतिक नाम Myrica Esculenta (मिरिका एस्कुलेन्टा ) है. यह मिरिकेसी प्रजाति का पौधा है.

वैसे तो इसे हिंदी में काफल या कायफल भी कहते हैं. लेकिन इसे अलग अलग भाषाओँ में अलग नामों से पुकारा जाता है.

आइये जानते हैं कि इसे किन भाषाओँ में किस नाम से पुकारते हैं –

"काफल के विभिन्न नाम "

संस्कृत में इसे “कट्टफल” के नाम से पुकारा जाता है. इसे “कैटर्य” या “कुम्भिका” भी कहते हैं. उर्दू में इसे “कायफल” कहते हैं.

कन्नड़ में “किरिशिवानी”, गुजराती में “कारीफल“, तमिल में “मरुदम पट्टई“, तेलुगु में “कैदर्यमु”, बंगाली में “कायफल“, नेपाली में “कोयबुसी”, पंजाबी में “कहेला”, मलयालम में “मेरुता“, और अरबी में “औतुल” के नाम से पुकारा जाता है.

काफल में मौजूद तत्व

छोटे से दिखने वाले इस फल में बहुत ही लाभकारी तत्व मौजूद हैं. काफल में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं. जो हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं.

ये एंटीऑक्सीडेंट करते क्या हैं?

एंटीऑक्सीडेंट का काम

एंटीऑक्सीडेंट हमारे शरीर में बनने वाले अनावश्यक फ्री रेडिकल्स (बैक्टीरिया) को नष्ट करने में मदद करता है.

दरअसल; हम सांस लेने में ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं. इस ऑक्सीजन के कारण हमारे शरीर में ऑक्सीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

जैसे कटे हुए सेब को थोड़ी देर हवा में रख देने पर वो लाल हो जाता है. ये ऑक्सीकरण के कारण होता है.

ऑक्सीकरण के कारण शरीर में अनावश्यक बैक्टीरिया बनने लगते हैं. यदि इन बैक्टीरिया को नष्ट ना किया जाय तो इनकी कोशिका में वृद्धि होने लगती है.

और यह हमारे शरीर में कई जानलेवा बीमारी; जैसे, दिल की बीमारी, कैंसर आदि को जन्म दे सकते हैं.

एंटीऑक्सीडेंट, ऑक्सीकरण के कारण, बनने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं.

काफल में भी एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा काफी अधिक होती है.

इसके अलावा काफल में माइरिकेटिन, मैरिकिट्रिन और ग्लाइकोसाइड्स भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं.

ये तत्व शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है.

इसकी पत्तियों में एक विशेष तरह का तत्व होता है, जो त्वचा सम्बन्धी रोगों के उपचार में काम आता है. इसमें फ्लावेन-4 और हाइड्रोक्सी-3 पाया जाता है.

यह त्वचा में कील, मुंहासे, ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स आदि को दूर करने के काम आता है.

काफल में आयरन भी काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है.

काफल के फायदे

वैसे तो काफल में मौजूद तत्वों से तो; आप समझ ही गए होंगे कि, काफल कितना लाभकारी है.

आइये विस्तार से जानते हैं कि; काफल खाने से, किन किन रोगों का इलाज़ किया जा सकता है.

पेट दर्द में लाभकारी काफ़ल

अगर आपका पेट दुःख रहा है. या पेट की गैस आपको जीने नहीं दे रही है. तो घबराइए मत.

काफल के फल को; नमक के साथ मिलाकर खाने से, पेटदर्द गायब हो जायेगा.

इसका एंटीऑक्सीडेंट आपको पल भर में राहत देगा.

बुखार में लाभकारी काफ़ल

काफल एक मौसमी फल है. मौसम में परिवर्तन के दौरान शरीर में कई प्रकार की बीमारियाँ, जैसे, बुखार, खांसी, बदन दर्द होता है.

इन सभी में काफल बहुत ही लाभकारी होता है.

  • काफल को शहद या अदरक के साथ खाने से बुखार, खांसी, उल्टी, दर्द में राहत मिलता है.
  • काफल के चूर्ण को; काली मिर्च के चूर्ण में मिलाकर, शहद के साथ खाने में, कफ वाली खांसी और बुखार से राहत मिलती है.

दस्त में लाभकारी काफ़ल

मौसम बदलने पर आमतौर पर दस्त लग जाते है. काफल; दस्त में भी राहत देते हैं.

  • काफल को शहद के साथ खाने से दस्त में लाभ मिलता है.
  • काफल की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से भी दस्त में लाभ मिलता है.

खांसी में लाभकारी काफ़ल

मौसम बदलने के दौरान कफ वाली खांसी, सूखी खांसी की समस्या उत्पन्न हो जाती है.

  • काफल को शहद के साथ खाने से खांसी और कफ से छुटकारा मिलता है.
  • काफल को गुड़ और तेल के साथ मिलाकर खाने से भी खांसी से राहत मिलती है.

दांत दर्द में लाभकारी काफ़ल

काफल से दांत दर्द में भी लाभ मिलता है.

  • काफल के पेड़ की छाल को चबाकर, दांतो के बीच रखने से दांत दर्द में राहत मिलती है.
  • काफ़ल का कादा बनाकर गरारा करने से भी दांत दर्द से छुटकारा मिलता है.

सिर दर्द में लाभकारी काफ़ल

काफल सिर दर्द में भी लाभकारी होता है. काफ़ल की छाल का चूर्ण बनाकर नाक से सूंघने पर सिर का दर्द गायब हो जाता है. लेकिन इसको सूंघने के दौरान विशेष सावधानी की जरुरत होती है.

मस्सों में लाभकारी काफल

बवासीर जैसी बीमारी में भी काफ़ल, लाभकारी साबित होता है.

काफ़ल का पेस्ट, मस्सों पर लगाने से, आराम मिलता है.

लकवा में लाभकारी काफल

जब लकवा के कारण, शरीर का अंग कार्य कर देना बंद कर देता है. तो काफ़ल के तेल की मालिश, इसमें रामबाण साबित हो सकती है.

सूजन में लाभकारी काफल

काफ़ल के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर, उस पेस्ट को, सूजन वाली जगह पर लगाने से राहत मिलती है.

विशेष नोट – काफल से जुडी हुई समस्त जानकारी को; आप सभी, आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह पर ही, प्रयोग करें.

काफ़ल से जुड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) की प्रसिद्ध कहानी

उत्तराखंड में चैत्र-वैशाख के दौरान एक लोककथा प्रचलित है.

इस लोककथा के अनुसार; चैत्र (मार्च) के महीने में गढ़वाल (उत्तराखंड) में 02 विशेष चिड़िया आती हैं. सामान्यतः चिड़ियों का अपना स्वर होता है. लेकिन; ये चिड़ियाँ, बहुत ही मार्मिक स्वर में, गढ़वाली (उत्तराखंड की बोली) में, गुनगुनाती हैं.

दोनों एक दूसरे से कहती है

काफ़ल पाक्यो; मिन नी चाख्यो ,

पुर पुतई पुर पुर

इसमें दोनों के बीच का संवाद बहुत ही मार्मिक और ह्रदय को छू जाने वाला है.

एक चिड़िया कहती है कि; काफल पक गए हैं, लेकिन मैंने एक भी नहीं चखे हैं.

तो दूसरी चिड़िया जवाब में कहती है कि; पूरे हैं बेटी, पूरे हैं.

अगर आप पूर्वजन्म में यकीन करते हैं, तो ये कहानी आपके लिए बहुत ही मजेदार होने वाली है.

लेकिन; पाठकों से अनुरोध है कि, वे कहानी के भाव को समझते हुए, इसे वास्तविकता से ना जोड़ें.

दरअसल; इस कहानी के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गयी है कि, हम प्रकृति पर निर्भर हैं. अगर प्रकृति; संसाधनों से युक्त ना होती, तो मनुष्य भूखा ही मर जाता.

काफल इस कहानी में; प्रकृति की उस संसाधानता को ही, दिखा रहा है. और; हमारी विवशता को, उस भूख के रूप में दिखाया जाता है, जिसके कारण माँ-बेटी अपने प्राण त्याग देते हैं.

वैसे तो मूल कहानी का स्वरुप कुछ और ही है. परन्तु; मैंने इसे अपने शब्दों में, अपनी भावना के तहत प्रस्तुत किया है. उम्मीद है, आपको अच्छा लगेगा.

तो आइये, कहानी का आनन्द लीजिये –

माँ-बेटी का प्रसंग (पूर्व जन्म)

“”उत्तराखंड की है ये कहानी …

गरीब परिवार की, दुर्दशा थी बतानी …

परिवार में थे केवल माँ और बेटी.

पर थे दोनों; किसाण और मेहनती.

दोनों चुनते, पेड़ों से काफल .

काफल बेच, लाते वो अन्न और पानी.

उत्तराखंड की है ये कहानी …

गरीब परिवार की, दुर्दशा थी बतानी …

एक रोज; माँ ने काफल तोड़, रख दिए आँगन के छांव.

भाग्य से मारी, किस्मत से हारी,

चल दी वो, खेतों की ओर, दबे पांव.

भूल से भी भूल हो गयी थी, उस बेचारी से,

धूप में सूख जायेंगे; वो, ये ना सोचा, उस नारी ने.

घर आने पर, थकी हारी, जब पड़ी उसकी नजर काफल पर,

इतने कम कैसे हो गए, ये सोच कर,

गुस्सा आया,उसे अपनी बेटी पर.

डांट डपट कर, पूछा उसने अपनी बेटी को,

क्यों खाये तूने काफल, जब रखे थे वो, बेचने को.

बेटी थी; इन सभी से अनजान,

वो तो सो रही थी, क्यूंकि; लगी थी उसे थकान.

घबराकर उसने, माँ से अपनी व्यथा सुनाई,

रोकर बोली; माँ मिन काफल नि खाई, काफल नि खाई.

पर किस्मत को था, कुछ और ही मंजूर,

माँ ने लड़की के सिर पे दे मारा, होके गुस्से में चूर.

लड़की थी कमजोर, माँ के वार को सह नहीं पाई,

यह बोलकर, प्राण निकल गए कि;

माँ; मिन काफल नि खाई, मिन काफल नि खाई.

बेटी की मौत पर, माँ को हुआ पछतावा,

यह कहकर, उसके भी प्राण निकल गए,

कि; पूरे हैं बेटी, पूरे हैं, यि त्वेन नि खाई.””

निष्कर्ष

आशा है, आपको कहानी पसंद आई होगी. अगर इसके मूल स्वरुप में छेड़छाड़ हुई हो, तो इसके लिए मैं ह्रदय से क्षमा प्रार्थी हूँ.

काफल का मार्मिक महत्व कितना भी अधिक क्यों ना हो, परन्तु, इसका स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्व काफी अधिक है.

आशा है; आपको इस आर्टिकल से जरुर कोई नवीन जानकारी मिली होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे, तो Please नीचे comment करके बताये. और इसे अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें. ताकि उन्हें भी यह नवीन जानकारी मिल सके.

Follow My Channel – “Geo Facts” On

Also Read My “BEST ARTICLES”

F&Q

काफल का वैज्ञानिक नाम क्या है?

इसका वैज्ञानिक नाम Myrica Esculenta (मिरिका एस्कुलेन्टा ) है. यह मिरिकेसी प्रजाति का पौधा है.

काफल में कौन कौन से तत्व मौजूद होते हैं?

इसमें में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं. जो हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं. इसके अतिरिक्त काफल में माइरिकेटिन, मैरिकिट्रिन और ग्लाइकोसाइड्स भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसकी पत्तियों में एक विशेष तरह का तत्व होता है, जो त्वचा सम्बन्धी रोगों के उपचार में काम आता है. इसमें फ्लावेन-4 और हाइड्रोक्सी-3 पाया जाता है. यह त्वचा में कील, मुंहासे, ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स आदि को दूर करने के काम आता है. काफल में आयरन भी काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है.

काफल के फायदे क्या हैं?

काफल सिर दर्द, बुखार, खांसी, कफ, वात, पित में लाभकारी होता है. इसके अलावा बवासीर में मस्सों को कम करने में, सूजन घटाने में, दांत दर्द और कान दर्द में भी सहायक होता है.

Summary
काफल में कौन से तत्व पाए जाते हैं. काफल को खाने से क्या लाभ और हानियाँ होती हैं?
Article Name
काफल में कौन से तत्व पाए जाते हैं. काफल को खाने से क्या लाभ और हानियाँ होती हैं?
Description
इस आर्टिकल में हम जानेंगे, काफल के गुणकारी तत्वों के बारे में. यह शरीर की किन बीमारियों को दूर कर सकता है. साथ ही काफल से जुडी हुई गढ़वाल की प्रसिद्ध कहानी के बारे में.
Author
Publisher Name
Geo Facts

This Post Has 7 Comments

  1. Dr. Sharad Visht

    Interesting fact & good for herbal research. Thank you Dr Ashutoah

  2. Rahul dev

    बहुत अच्छी जानकारी सर 🙏

  3. Anonymous

    काफल के बारे में बहुत सुंदर जानकारी दी गई है साथ ही एक बेहद मार्मिक कहनी भी जो पहाड़ में बहुत प्रचलित है।💐💐💐👌👍

  4. D. S. Jangwan

    Very nice ati Sundar

  5. Anonymous

    Very interesting kafal story

Leave a Reply