क्यों पड़ते हैं तूफान के नाम – कटरीना, फैनी और अम्फान ?

क्यों पड़ते हैं तूफान के नाम – कटरीना, फैनी और अम्फान ?

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तूफान निसर्ग मुंबई पहुँच चुका है. अम्फान ने पश्चिम बंगाल में दी दस्तक. उड़ीसा के तटवर्ती इलाकों में जल्दी ही तितली पहुचनें वाली है. इन नामों से ऐसा लग रहा है; जैसे कोई V.I.P. आने वाला हो, और उसके स्वागत के लिए हम सभी को जाना चाहिए. वास्तव में; ये सभी तूफान के नाम हैं. WMO (World Meteorological Organization) के द्वारा इनके नामों की स्वीकृति दी जाती है.

परन्तु; WMO को इनके नामों की संस्तुति कौन करता है? क्या भारतीय मौसम विभाग भी इनके नामों की लिस्ट तैयार करता है? साथ में हम यह भी जानेंगे कि; तूफान के नाम महिलाओं के नाम पर क्यों रखे जाते हैं? आइये जानते हैं –

तूफान के नाम की शुरुआत

द्वितीय विश्व युद्ध तक; तूफान का नाम, महिलाओं के ऊपर रखते थे. जैसे A से W अक्षर तक महिलाओं के जितने नाम होते थे; यह नाम तूफान को दे दिए जाते थे. कितनी हास्यास्पद बात है. परन्तु; महिला संगठन के विरोध के कारण यह परम्परा हटा दी गयी.

उसके बाद; 1978 से आधे चक्रवातों को मर्दों के नाम दिए जाने लगे.

दरअसल; तूफान का नाम रखने की विधिवत शुरुआत; अमेरिका के मियामी स्थित, “राष्ट्रीय हरिकेन सेंटर” ने 1953 से की. इस सेंटर ने; अटलांटिक महासागर में आने वाले, हरिकेन और चक्रवात को विधिवत नाम देना शुरू किया.

परन्तु; यह सेंटर भी केवल अटलांटिक और प्रशांत महासागर में आने वाले तूफान को ही नाम देता था.

राष्ट्रीय हरिकेन सेंटर द्वारा सुझाये गए नाम

राष्ट्रीय हरिकेन सेंटर ने; 2025 तक के लिए, नामों की लिस्ट तैयार कर ली है. परन्तु यह नाम केवल अटलांटिक और प्रशांत महासागर के लिए है. इस लिस्ट में; प्रत्येक साल अंग्रेजी के A से W अक्षर तक के नाम होते हैं. इसकी कुछ झलकियाँ इस प्रकार हैं –

2021 2022 2023 2024 2025
AnaAlexArleneAlbertoAndrea
BillBonnieBretBerylBarry
ClaudetteColinCindyChrisChantal
DannyDanielleDonDebbyDorian
Source: National Hurricane Center and Central Pacific Hurricane Center

परन्तु; एक बड़ा सवाल यह है कि, आखिर

आखिर; तूफान को नाम देने की आवश्यकता क्यों पड़ती है ?

Actually; यहाँ तूफान से तात्पर्य, मंद मंद बहने वाली ठंडी हवाओं के झोंकों से नहीं हैं. बल्कि; 70 से 150 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से, बहने वाली आंधी तूफान से है. जो कि; अपने रास्ते में आने वाली हर एक वस्तु को तबाह कर देती है.

इसीलिए; तूफान को रफ़्तार के आधार पर 5 श्रेणियों में बांटा गया है –

श्रेणियां हवाओं के रफ़्तार नुकसान
I 74 – 95 मील / घंटामामूली नुकसान
II96 – 110 मील / घंटाबाड़ का खतरा, मकानों की खिडकियों को नुकसान
III110 – 130 मील / घंटाघर को बड़े पैमाने पर नुकसान
IV 130 – 150 मील / घंटाभीषण बाड़, बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप्प
V150 मील / घंटा से अधिकविनाशकारी क्षति
"चक्रवातों की श्रेणियां"

इसके अलावा; तूफान एक बहुत बड़े क्षेत्र को प्रभावित करता है. जिसमें कुछ राज्य से लेकर; कुछ देश भी शामिल हो सकते हैं.

जबकि; दूरी और भाषा के सन्दर्भ में, भारत में एक कहावत प्रचलित है कि-

कोस -कोस पर बदले पानी, 4 कोस पर बानी

यहाँ 1 कोस की दूरी का मतलब है – लगभग 03 किलोमीटर .

तो कुछ दूरी पर भाषाएँ बदल जाती हैं. और जब दूरी; कुछ राज्यों की हो, या कुछ देशों की, तो यहाँ पर नाम और उनके अर्थ भी बदल जाते हैं.

जैसे; आंधी तूफान को अलग अलग देशों में; अलग-अलग नाम – हरिकेन, साइक्लोन, टाइफून, विली विली आदि से पुकारा जाता है. जबकि; इन सभी का एक ही मतलब है – तबाही.

इसीलिए; किसी क्षेत्र में लोगों को चेतावनी देने या जागरूक बनाने के उद्देश्य से अलग अलग नामों का प्रयोग किया जाता है. ताकि; उस क्षेत्र के लोग तूफान आने पर, सतर्क हो जाएँ और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएँ.

तूफान के लिए दुनिया को बांटने की शुरुआत

इसकी शुरुआत हुई 1986 से. चेर्नोबेल परमाणु दुर्घटना के बाद; दुनिया के सभी देशों के बीच, strong communication को बनाने तथा परमाणु दुर्घटना होने पर लोगों को सतर्क करने के उद्देश्य से Early Warning System को बनाने पर विचार होने लगा.

यह सुझाव; IAEA (International Atomic Energy Agency) ने, विश्व मौसम संगठन (World Meteorological Organization) को दिया था.

इसी के परिणामस्वरूप 06 RSMC (Regional Specialized Meteorological Centers) केंद्र बनाये गए. जो पूरी दुनिया को cover करते हैं. ये RSMC केंद्र; IAEA तथा WMO के बीच एक पुल का काम करते हैं.

RSMC (Regional Specialized Meteorological Centers)

RSMC केंद्र का काम; अपने अपने क्षेत्र में आपदा की चेतावनी, सूचना तथा सुझाव देना है. विश्व मौसम संगठन (WMO) के Tropical Cyclone Program के अंतर्गत निम्न RSMC केंद्र तथा TCWC (Tropical Cyclone Warning Centers) केंद्र बनाये गए हैं. जो दुनिया के अलग अलग हिस्से cover करते हैं.

RegionDescriptionCenters (RSMC & TCWC)
I – IIAtlantic & Eastern Pacific Miami (RSMC)
IIICentral Pacific Honolulu (RSMC)
IVNorthwest Pacific Tokyo (RSMC)
VNorth Indian Ocean New Delhi (RSMC)
VISouthwest Indian Ocean La Reunion (RSMC)
Perth (TCWC)
Jakarta (TCWC)
VII – XISouthwest Pacific and
Southeast Indian Ocean
Darwin (TCWC)
Port Moresby (TCWC)
Brisbane (TCWC)
XII – XIIISouth Pacific Nadi (RSMC)
Wellington (TCWC)
तूफान के लिए बनाये गए केंद्र "RSMC and TCWC"

उत्तरी हिन्द महासागर क्षेत्र का RSMC केंद्र : नई दिल्ली

उत्तरी हिन्द महासागर में; बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले तूफान के लिए, RSMC केंद्र – भारतीय मौसम विभाग (IMO) नई दिल्ली है. भारतीय मौसम विभाग- नई दिल्ली, यहाँ उठने वाले तूफानों की निगरानी करता है. इस सन्दर्भ में चेतावनी तथा सूचनाओं का प्रसारण करता है.

विश्व मौसम संगठन (WMO) के Tropical Cyclone Program के तहत; WMO और ESCAP (Economic and Social commission for Asia and the Pacific) ने 1972 में एक panel गठित किया. जिसे “WMO/ESCAP Panel On Tropical Cyclone(PTC) कहा गया.

इस panel का उद्देश्य; हिन्द महासागर के क्षेत्र में उठने वाले तूफान की मोनिटरिंग करना, इस सन्दर्भ में सूचना, चेतावनी तथा सुझाव देना है.

RSMC के सदस्य देश

वर्तमान में WMO/ESCAP Panel on Tropical Cyclone के अंतर्गत 13 देश हैं. ये सभी देश; हिन्द महासागर से उठने वाले तूफान से प्रभावित रहते हैं. इनके नाम हैं –

बाग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यामार, ओमान, पाकिस्तान, क़तर,सऊदी अरब, श्री लंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन.

2000 से एसी परम्परा शुरू हुई कि; ये देश, इस क्षेत्र में आने वाले तूफान के नाम स्वयं रखेंगे. उस समय तक इस panel में केवल 08 देश शामिल थे. इसमें ईरान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन देश बाद में शामिल हुए.

IMO ने जारी की तूफान के नाम की नई लिस्ट

2004 में सभी के बीच एक सहमति बनी कि; सभी 13 सदस्य 13 नाम की एक लिस्ट तैयार करेंगे.

अभी हाल ही में अप्रैल, 2020 में IMO ने इस सन्दर्भ में 169 नामों के एक लिस्ट जारी की है. जिसमें सभी 13 सदस्य देशों के द्वारा 13 नाम (13 * 13 = 169) सुझाये गए हैं.

13 सदस्यों की लिस्ट को देखने लिए यहाँ क्लिक करें – Tropical Cyclone Name List

इस लिस्ट में भारत के द्वारा सुझाये गए नामों में – अग्नि, आकाश, बिजली, जल, लहर, मेघ, सागर जैसे शब्द शामिल हैं.

पाकिस्तान की ओर से सुझाये गए नामों में – लैला, तितली, बुलबुल. नर्गिस जैसे शब्द शामिल है

नाम रखने की शर्तें

सदस्य देशों द्वारा नाम रखने की कुछ शर्ते हैं, जो इस प्रकार हैं –

  1. कोई भी नाम किसी भी जाति, धर्म, सम्प्रदाय या किसी राजनैतिक पार्टी से प्रेरित नहीं होना चाहिये.
  2. नाम से किसी भी मानव सभ्यता की भावनाओं को ठेस नहीं पंहुचना चाहिये.
  3. इससे किसी असभ्य भाषा या अर्थ नहीं निकलना चाहिये.
  4. अक्षरों की संख्या 8 से अधिक नहीं होनी चाहिये.
  5. नाम के साथ साथ उसका उच्चारण और voice over भी बताना होगा.
  6. जो नाम एक बार प्रयोग हो गया हो, वह दुबारा प्रयोग नहीं होगा.

Some Interesting Facts

  • ऑस्ट्रेलिया में 1953 तक चक्रवातों के नाम भ्रष्ट नेताओं के नाम पर रखे जाते थे .
  • जबकि; अमेरिका में महिलाओं के नाम पर.
  • अभी वर्तमान में अमेरिका में नाम रखने में Odd-Even System चलता है. जैसे Odd year (2001,2003) में जब तूफान आता है, तो नाम – महिलाओं के रखे जाते हैं.
  • Even year (2002, 2004) में तूफान आने पर नाम – पुरुषों के रखे जाते हैं.
  • अमेरिका हर साल के लिए तूफान के 21 नामों की लिस्ट तैयार करता है. जिसमे Q, U, X, Y तथा Z को छोड़कर शेष सभी अक्षरों का प्रयोग किया जाता है.
  • अगर 21 से ज्यादा तूफान आ गए; तो नाम, ग्रीक अक्षर – अल्फ़ा, बीटा, गामा से शुरू किये जाते हैं.

निष्कर्ष

तो देखा आपने; कि आखिर तूफान को नाम क्यों दिया जाता है. कैसे पूरी दुनिया में किसी भी आपदा से निपटने के लिए Early Warning System को विकसित किया गया है.

आशा है; आपको इस आर्टिकल से जरुर कोई नवीन जानकारी मिली होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे, तो Please नीचे comment करके बताये. और इसे अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें. ताकि उन्हें भी यह नवीन जानकारी मिल सके.

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F&Q

तूफान के नाम की शुरुआत कब से हुई?

तूफान का नाम रखने की विधिवत शुरुआत; अमेरिका के मियामी स्थित, “राष्ट्रीय हरिकेन सेंटर” ने 1953 से की. इस सेंटर ने; अटलांटिक महासागर में आने वाले, हरिकेन और चक्रवात को विधिवत नाम देना शुरू किया.

उत्तरी हिन्द महासागर क्षेत्र में उठने वाले तूफान कीं निगरानी कौन करता है?

भारतीय मौसम विभाग – नई दिल्ली

उत्तरी हिन्द महासागर क्षेत्र में उठने वाले तूफानों के लिए लैला, तितली, बुलबुल, नर्गिस नाम किसने दिए?

तितली, बुलबुल, लैला और नर्गिस नाम पाकिस्तान ने दिए.

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क्यों पड़ते हैं तूफान के नाम - कटरीना, फैनी और अम्फान ?
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क्यों पड़ते हैं तूफान के नाम - कटरीना, फैनी और अम्फान ?
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तूफान के अजीबोगरीब नाम क्यों रखे जाते हैं? WMO (World Meteorological Organization) के द्वारा इनके नामों की स्वीकृति दी जाती है. परन्तु; WMO को इनके नामों की संस्तुति कौन करता है? क्या भारतीय मौसम विभाग भी इनके नामों की लिस्ट तैयार करता है? साथ में हम यह भी जानेंगे कि; तूफान के नाम महिलाओं के नाम पर क्यों रखे जाते हैं?
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Geo Facts

This Post Has 6 Comments

  1. Dr. Sharad Visht

    Wao, Interesting Dr Ashutosh

  2. Diya

    interesting fact

  3. Anonymous

    aap gyan ke bhandar ho sir 🙏🙏🙏🙏

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