जानिए क्यों आता है भूकंप ? और कैसे पता लगाते हैं कि भूकंप की शुरुआत (Epicenter) पृथ्वी के किस हिस्से से हुई है? (Bhukamp In Hindi)

जानिए क्यों आता है भूकंप ? और कैसे पता लगाते हैं कि भूकंप की शुरुआत (Epicenter) पृथ्वी के किस हिस्से से हुई है? (Bhukamp In Hindi)

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इस आर्टिकल में आप जान सकेंगे कि, भूकंप क्यों आता है ? कैसे वैज्ञानिक यह पता लगा पाते हैं कि; भूकंप की शुरुआत (अधिकेन्द्र – Epicenter), पृथ्वी के किस हिस्से से हुई है ? क्या P और S तरंगों का भूकंप के अधिकेन्द्र (Epicenter) से कोई सम्बन्ध है ? अभी हाल में; म्यामांर में 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किये गए , जिसका अधिकेन्द्र (Epicenter) म्यामांर के खामपट से 68 किमी दूर था. आखिर कैसे; इसका पता चला कि, यह भूकंप, खामपट से 68 किमी दूर था ?

साथ ही आप जान सकेंगे कि, क्या भूकंप के प्रभाव सिर्फ विनाशकारी ही होते हैं? या उनसे कुछ लाभकारी प्रभाव भी होते हैं? आखिर; भूकंप के झटके, तीव्रता कहलाते हैं या परिमाण ? क्या अंतर होता है; भूकंप की तीव्रता (Intensity) और परिमाण (Magnitude) में ? कैसे; भूकंपीय तरंगों को मापते हैं , और; भूकंप के जोन V और जोन II में कौन ज्यादा खतरनाक है और क्यों ?

इसके अतिरिक्त; आप यह भी जान सकेंगे कि, भूकंप क्यों आता है? और भूकंप से बचने के उपाय क्या क्या हैं ? आइये; इन सभी को विस्तार से जानते हैं –

अनुक्रम

भूकंप क्या है –

भूकंप का अर्थ है – “पृथ्वी का अचानक से हिलना.” दूसरे शब्दों में; जब पृथ्वी के धरातल में अचानक हलचल होने से कंपन होता है, तो उसे भूकंप कहते हैं.

परन्तु सवाल ये उठता है कि, “पृथ्वी अचानक से हिलना शुरू क्यों करती है?”

Actually; पृथ्वी के अन्दर से, जब ऊर्जा बाहर निकलती है. तो यही ऊर्जा; तरंगों के रूप में, पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों को हिलाना शुरू करती है. जिसे हम ‘भूकंप के झटके’ के रूप में महसूस करते हैं.

परन्तु; एक बड़ा सवाल है कि,

भूकंप क्यों आता है?

पृथ्वी के सबसे बाहरी ठोस परत को भूपर्पटी (Crust) कहते हैं. इस ठोस परत के कुछ हिस्सों में गहरी दरारें होती हैं, जिसे भ्रंश (Faults) कहा जाता है. यह भ्रंश; भूपर्पटी (Crust) के बहुत कमजोर स्थान होते हैं. अतः; पृथ्वी के अन्दर से निकली ऊर्जा, इन्हीं भ्रंश के सहारे से बाहर निकलती है. इसी कारण से भूकंप आते हैं.

भ्रंश और उसके आसपास के क्षेत्र, भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं.

भूकंप की परिभाषा

पृथ्वी के अन्दर ; जिस स्थान से , सबसे पहले भूकंप की उत्पति होती है, उस स्थान को भूकंप मूल (Focus) या “Hypocenter” कहा जाता है.

पृथ्वी के बाहर धरातल पर; भूकंप मूल के ठीक ऊपर का स्थान, जहाँ पर भूकंप के झटके सबसे पहले अनुभव किये जाते हैं, उसे अधिकेन्द्र (Epicenter) कहते हैं.

पृथ्वी के बाहर धरातल पर; अधिकेन्द्र के ठीक विपरीत स्थान के केंद्र को विपरीत ध्रुव केंद्र (Anticenter) कहते हैं.

जिन -जिन क्षेत्रों में ; समान तीव्रता के भूकंप आते हैं , उन क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा ,सम्भूकम्पीय रेखा (Isoseismal Line) कहलाती है.

जिन – जिन क्षेत्रों में ; एक समय पर भूकंप आते हैं, ( मान लीजिये 04:00 बजे जिन जिन क्षेत्रों में भूकंप के झटके आये होंगे ) उन क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा , सह्भूकम्पीय रेखा (Homoseismal Line) कहलाती है.

परन्तु; एक बड़ा सवाल यह है कि, भूकंप के लिए इतनी ऊर्जा आती कहाँ से है ?

भूकंप के कारण

Actually; भूकंप के कारण कई होते हैं. क्यूंकि; धरातल को हिलाने जैसी ताकत, कई जगह से मिलती है.

1. प्राकृतिक कारण 2. मानव निर्मित कारण 3. अन्य कारण
1.1 प्लेट विवर्तिनिकी2.1 अणु/परमाणु बम परीक्षण3.1 उल्कापात
1.2 भू संतुलन अव्यवस्था2.2 बाँध से निर्मित जल दबाव
1.3 ज्वालामुखी घटना

आइये विस्तार से जानते हैं कि, भूकंप कैसे आता है –

1. प्राकृतिक कारण

भूकंप के कारण में ; प्लेट विवर्तिनिकी , सर्वप्रमुख है.

1.1 प्लेट विवर्तिनिकी (Plate Tectonic)

विवर्तिनिकी का सम्बन्ध; पृथ्वी के धरातल के अन्दर, घटने वाली सभी क्रियाओं से होता है. चाहे वह क्रिया मैग्मा या ज्वालामुखी से जुड़ी हो; या, भूकंप से.

जबकि; प्लेट, पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) के टूटे हुए हिस्सों को कहते हैं. आपको बताते चलें कि; पृथ्वी की भूपर्पटी 06 बड़ी प्लेटों और 06 छोटे प्लेटों में बंटी हुई है. जिनके नाम इस प्रकार से हैं –

बड़ी प्लेट छोटी प्लेट
1. प्रशांत प्लेट1. अरेबियन प्लेट
2. अफ़्रीकी प्लेट2. फिलीपींस प्लेट
3. यूरेशियन प्लेट3. कोकोस प्लेट
4. अमेरिकन प्लेट4. कैरेबियन प्लेट
5. इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट5. नाज्का प्लेट
6. अन्टार्क्टिका प्लेट6. स्कोशिया प्लेट
"प्लेट विवर्तिनिकी और भूकंप"
“पृथ्वी पर प्लेटों का वितरण”

ये सभी प्लेट स्थिर नहीं हैं; बल्कि, गतिशील हैं. इनमे कुछ प्लेट एक-दूसरे की ओर आ रही हैं. जबकि; कुछ प्लेट एक दूसरे से दूर जा रही हैं.

जब दो प्लेटें एक – दूसरे की ओर आकर टकराती हैं. तो उसे विनाशी प्लेट सीमान्त (Destructive Plate Margin)कहते हैं.

जब दो प्लेटें एक – दूसरे से दूर जाती हैं. तो उसे रचनात्मक प्लेट सीमान्त (Constructive Plate Margin) कहते हैं.

भूकंप ; इन्हीं “विनाशी प्लेट सीमान्त ” (Destructive Plate Margin) के कारण उत्पन्न होते हैं.

1.1.1. प्लेट विवर्तिनिकी और भूकंप

जब एक भारी प्लेट और हल्की प्लेट आपस में टकराती है; तो भारी प्लेट, हल्की प्लेट को ऊपर उठा लेती है.

ठीक वैसे ही,

“जैसे लड़ाई में; एक भारी पहलवान, हल्के इंसान को आसानी से ऊपर उठा लेता है.”

इस दौरान; भारी प्लेट, हल्की प्लेट के नीचे, धंसती जाती है और खाई (Trench) का निर्माण करती है.

“मेरियाना खाई (Mariana Trench)” विश्व की सबसे गहरी खाई है, जो प्रशांत महासागर में स्थित है. इसकी गहराई लगभग 11000 मी है. यहाँ प्रशांत प्लेट भारी होने के कारण , फिलीपिंस प्लेट के नीचे धंस रही है.

जब भारी प्लेट; खाई में निरंतर धंसती जाती है. तो वह भारी प्लेट; मेंटल (Mental) में जाकर मैग्मा में पिघल जाती है.

मेंटल (Mental); पृथ्वी की सबसे उपरी परत, भूपर्पटी (Crust) के, नीचे की परत है.

1.1.1.1. मेंटल में होता है भूकंप के निर्माण की तयारी

मेंटल में जब; भूपर्पटी के पिघलने से, अतिरिक्त मैग्मा का निर्माण होने लगता है. तो यही अतिरिक्त मैग्मा; अतिरिक्त गैस का भी निर्माण करने लगता है. क्यूंकि इन खाइयों के सहारे महासागरीय जलराशि भी मेंटल में पहुचती है.

यह गैस; मेंटल में धीरे धीरे इकठा होना शुरू होती है. और एक सीमा के पश्चात्; जब गैस काफी अधिक हो जाती है, तो यह गैस, भूपर्पटी के कमजोर हिस्सों (भ्रंशों) के सहारे बाहर निकल आती है. इसे ही हम भूकंप का नाम देते हैं.

ठीक वैसे ही,

जैसे; प्रेशर कुकर के अन्दर, धीरे धीरे गैस (प्रेशर) इकठ्ठा होती है. और; एक समय के बाद; जब गैस, पर्याप्त हो जाये, तो वह सीटी के सहारे बाहर निकल आती है.

इसीलिए वैज्ञानिक; हर 10 या 20 साल के बाद भूकम्प आने के संकेत देते हैं. क्यूंकि; उन्हें पता है कि; धरती के अन्दर इतने समय तक काफी अधिक गैस इकठ्ठा हो जाती है.

तो देखा आपने; प्लेट विवर्तिनिकी के कारण, भूकम्प किस प्रकार आते हैं?

1.2 भू संतुलन अव्यवस्था (Isostatic Imbalance)

धरातल पर विभिन्न ऊँचाइयों की स्थालाकृतियाँ पायी जाती हैं. जैसे – ऊँचे पर्वत, कम ऊँचे पठार और सबसे कम ऊंचाई के मैदान.

धरातल पर विभिन्न ऊँचाइयों के स्थालाकृतियों के बीच एक संतुलन पाया जाता है. इसे भूसंतुलन (Isostasy) कहते हैं.

अपरदन के विभिन्न करक – नदी, हिमानी आदि, ऊँचे पर्वतों और पठारों को काटकर; finally, समुद्र में उन्हें जमा करती जाती है.

इससे; पर्वत निरंतर कटते जाते हैं, और; उनका घनत्व कम होता जाता है. समुद्र की तली में; निरंतर अवसाद जमा होने से, समुद्र की तली का घनत्व अधिक होता रहता है.

इस कारण से; अपरदन के कारक, धरातल के संतुलन को बिगाड़ते रहते हैं. और; यही असंतुलन, एक समय के पश्चात् भूकंप के कारण बन जाते हैं.

1949 में हिन्दुकुश के पर्वतीय क्षेत्रों में, इसी कारण से भूकंप की उत्पति हुई.

1.3. ज्वालामुखी विस्फोट

ज्वालामुखी विस्फोट भी भूकंप के कारण में प्रमुख रूप से शामिल है. हालाँकि; हर ज्वालामुखी विस्फोट में भूकंप आये, ऐसा जरुरी भी नहीं है.

2. मानव निर्मित कारण

मनुष्य ने जल संसाधन का सही उपयोग करने के लिए, नदियों पर बाँध बना दिए हैं. जिस कारण; बाँध जलाशय में जल दबाव के कारण भी भू संतुलन बिगड़ता है.

इसके अतिरिक्त; मानव जब परमाणु परीक्षण करता है, तो उसके धमाकों से भी भूकंप आते हैं.

3. अन्य कारण

अंतरिक्ष से जब कभी पृथ्वी पर उल्कापात की घटना होती है, तो उनके टकराने से भी भूकम्प आते हैं. हालाँकि; ये कभीकभार ही संपन्न होते हैं.

तो देखा आपने; पृथ्वी पर भूकंप के कारण क्या क्या हैं.

अब सवाल ये उठता है कि;

भूकंप को कैसे मापा जाता है?

जैसा कि अभी आपको बताया गया है कि; पृथ्वी के अन्दर से ऊर्जा, तरंगों के रूप में बाहर आती है.

भूकंप का मापन, इन्हीं तरंगों को माप करके किया जाता है.

सीस्मोग्राफ (Seismograph) – यह यंत्र भूकंपीय तरंगों को मापता है.

सीस्मोग्राम (Seismogram) – सीस्मोग्राफ , जिस रिपोर्ट को कागज़ में उतारता है. उस रिपोर्ट को सीस्मोग्राम कहते हैं.

भूकंप उत्पति केंद्र (Focus) से तीन प्रकार की तरंगे उत्पन्न होती हैं

  • P Waves (Primary Waves)
  • S Waves (Secondary Waves)
  • L Waves (Long Waves)
विशेषताएं P WavesS Waves L Waves
गति सबसे अधिकP Waves से कमसबसे कम
कहाँ संचरण करती हैं ठोस,तरल और गैसकेवल ठोसकेवल धरातल के ऊपर
तरंगों की प्रकृतिअनुदैर्ध्यअनुप्रस्थअनुदैर्ध्य और अनुप्रस्थ
तीव्रता सबसे कमP की अपेक्षा अधिकसबसे अधिक
सादृश्यता ध्वनि तरंगों के समानप्रकाश तरंगों के समानजल तरंगों के समान

सीस्मोग्राफ यंत्र; इन्हीं P, S और L Waves को मापता है. जिसके आधार पर भूकंप की तीव्रता और परिमाण का निर्धारण किया जाता है.

परन्तु; इन तरंगों के आधार पर, ये कैसे पता लगाया जाता है कि, भूकंप पृथ्वी के किस हिस्से से शुरू हुआ है?

आइये जानते हैं –

भूकंप अधिकेन्द्र (Epicenter) का पता कैसे लगाते हैं ?

भूकंपीय तरंगों को मापने के लिए सीस्मोग्राफ यंत्र को कुछ ख़ास स्टेशन पर लगाया जाता है. इन स्टेशन को भूकंप वेधशाला कहते हैं. ये स्टेशन केवल भूकंपीय तरंगों को मापने का ही कार्य करते हैं.

National Center For Seismology (NCS) भारत में भूकंपीय तरंगों की मोनिटरिंग करता है. इसके लिए NCS के द्वारा देश भर में 115 भूकंपीय वेधशाला बनाये गए हैं. भारत में पहली भूकंपीय वेधशाला 01 दिसंबर 1898 को कोलकाता में स्थापित की गयी थी.

सीस्मोग्राफ काम कैसे करता है?

अधिकेन्द्र का पता लगाने के लिए; सबसे पहले रिकॉर्ड की गयी, P Waves और S Waves के बीच के समय का प्रयोग करते हैं.

"Seismogram"
फोटोचित्र 1 : Seismogram में P और S Waves की स्थिति
  • सबसे पहले प्रारंभिक P और S Waves के बीच के समय को मापते हैं. उपर फोटोचित्र 1 में यह दूरी 24 सेकंड है. यहाँ 1 मिलीमीटर, 1 सेकंड को दर्शा रहा है.

उसके पश्चात्; 24 सेकंड की इस दूरी को नीचे दिए हुए स्केल के अनुसार रखते हैं.

"Amplitude, Magnitude Scale"
फोटोचित्र 2: Magnitude & Amplitude Scale
  • फोटोचित्र 2 में सबसे बांये scale के अनुसार; 24 सेकंड की दूरी, यह बता रही है कि, भूकंप का अधिकेन्द्र, वेधशाला से 215 किमी दूर है.

इसके पश्चात् जिन 03 वेधशालाओं में P और S Waves को मापा गया था. मानचित्र में, उन तीनों वेधशालाओ की Location से 215 किमी की दूरी का एक वृत्त खीचेंगे. यह वृत्त मापनी के अनुसार बनाया जायेगा.

जैसे – यदि मानचित्र की मापनी के अनुसार, 1 सेमी की दूरी 100 किमी को दर्शा रही है. तो तीनों वेधशालाओं की location से 2.15 सेमी का वृत्त खींचा जायेगा.

ये तीनों वृत्त आपस में जहाँ भी काटेंगे, वही भूकंप अधिकेन्द्र होगा. इसी आधार पर यह ज्ञात किया जाता है कि, भूकंप का अधिकेन्द्र कहाँ पर है.

रिक्टर स्केल और मर्केली स्केल में अंतर

भूकंप की जानकारी के लिए सीस्मोग्राफ यंत्र का उपयोग किया जाता है.

Actually; भूकंप के दौरान निकली ऊर्जा और भूकंप के कारण होने वाले नुकसान को अलग मापा जाता है.

भूकंप के दौरान; पृथ्वी के अन्दर से, जितनी ऊर्जा बाहर आती है. उस ऊर्जा की मात्रा को भूकंप का परिमाण कहते हैं. इसे रिक्टर स्केल द्वारा मापा जाता है.

भूकंप के कारण जो हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होता है, उसे भूकंप की तीव्रता कहते हैं. इसे मर्केली स्केल द्वारा मापा जाता है.

रिक्टर स्केल मर्केली स्केल
इसमें 1 से 9 तक की संख्याएँ होती हैं.इसमें 1 से 12 तक की होती हैं.
यह open ended scale होता है. मतलब भविष्य में इस स्केल का मान बढाया जा सकता है.इसका scale closed ended होता है. मतलब इसका मान बढाया नहीं जा सकता है.
यह एक मात्रात्मक स्केल है.यह एक गुणात्मक स्केल है.

भूकंप के प्रभाव

वैसे तो भूकंप; दुनिया में तबाही ही मचाता है. परन्तु; इसके कारण कुछ लाभकारी प्रभाव भी देखने को मिलते हैं.

आइये जानते हैं –

1. लाभकारी प्रभाव

  • भूकंप के कारण; समुद्र तटवर्ती क्षेत्रों में , जलमग्न भूमि, समुद्री सतह से ऊपर आ जाती है. जिस कारण; उपजाऊ मैदान का निर्माण हो जाता है.
  • भूकंप के प्रभाव के रूप में; तटवर्ती भूमि के नीचे धंसने से, बंदरगाहों का निर्माण आसान हो जाता है.
  • अचानक भ्रंशन की क्रिया से; बहुमूल्य खनिज, धरातल पर आ जाते हैं.
  • भूकंप के कारण, झीलों का निर्माण हो जाता है.

भूकंप पेटी का विश्व वितरण

विश्व स्तर पर भूकंप पेटी का निर्धारण; प्लेट विवर्तिनिकी सिद्धांत द्वारा किया जाता है. इस सिद्धांत के अनुसार पुरे विश्व को निम्न भूकंपीय पेटी में बांटा जाता है.

1.परिप्रशांत पेटी

यह पेटी पूरे प्रशांत महासागर के चारों ओर महाद्वीपों और द्वीपों में स्थित है. इस पेटी में विश्व का 63% भूकंपीय क्षेत्र शामिल है. इस पेटी में नवीन मोडदार पर्वत और ज्वालामुखी क्षेत्र शामिल हैं, जिस कारण यहाँ पर भूकंप अधिक आते हैं.

2. मध्य महाद्वीपीय पेटी

इसके अंतर्गत विश्व का कुल 21 % भूकंपीय क्षेत्र शामिल है. इस पेटी में नवीन मोडदार पर्वतों की श्रृंखला शामिल है. भारत का भूकंपीय क्षेत्र भी इसी पेटी में शामिल है.

3. मध्य अटलांटिक महासागरीय पेटी

यह पेटी मध्य अटलांटिक महासागर के चारों ओर विस्तृत है. इसमें विश्व का लगभग 13 % भूकंपीय क्षेत्र शामिल है.

4. अंतराप्लेट भूकंपीय क्षेत्र

विश्व में कुछ ऐसे भूकंपीय क्षेत्र हैं, जो प्लेट के आतंरिक भाग में शामिल है. इनकी व्याख्या प्लेट विवर्तिनिकी सिद्धांत द्वारा नहीं की जा सकती है.इसके अंतर्गत मंगोलिया, हवाई द्वीप तथा उत्तरी चीन के भाग शामिल हैं.

भारत के भूकंप क्षेत्र

भूकंप की तीव्रता के आधार पर भारत को 04 भूकंप जोन में बांटा गया है.

तीव्रता क्षेत्र मर्केली स्केल पर तीव्रताक्षेत्र
जोन – V (बहुत अधिक खतरनाक)9 और 9 से अधिकउत्तराखंड , कश्मीर घाटी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सम्पूर्ण पूर्वोतर राज्य
जोन – IV (खतरनाक)8जम्मू और कश्मीर और हिमाचल के बचे हुए भाग , दिल्ली, सिक्कीम, बिहार, पश्चिम बंगाल.
जोन – III (मध्यम)7उत्तर प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल के बचे हुए भाग, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र
जोन – II (कम तीव्रता वाले)6 या 6 से कमदेश के बचे हुए भाग

उपर्युक्त टेबल से स्पष्ट है कि ; भारत में हिमालय क्षेत्र, भूकंप की दृष्टि से बहुत खतरनाक क्षेत्र हैं.

इसके पीछे मुख्य कारण है कि; भारतीय – ऑस्ट्रेलियन प्लेट, यूरेशियन प्लेट के नीचे, 2 सेमी प्रति वर्ष की दर से धंश रही है.

हिमालय क्षेत्र में विशाल भ्रंश हैं.

  • M.C.T. (Main Central Thrust) – यह महान और लघु हिमालय के मध्य हैं.
  • M.B.T. (Main Boundary Thrust) – यह लघु और शिवालिक हिमालय के मध्य में है.
  • H.F.F. (Himalayan Front Fault) – यह शिवालिक और विशाल मैदान के मध्य में है.

भूकंप से बचने के उपाय

भूकंप के कारण तो प्राकृतिक होते हैं. परन्तु; थोड़ी सी सूझ बूझ के कारण, इससे बचा जा सकता है.

  • सबसे पहले भूकंप रोधी मकानों का निर्माण किया जाये.
  • भूकम्प आने पर अफरा तफरी ना मचाएं.
  • यदि आप मकान के अन्दर हैं; तो बाहर खुले मैदान की ओर जाएँ.
  • यदि आप बहुमंजिला ईमारत में हैं; और बाहर खुले मैदान में नहीं जा सकते, तो घर के अन्दर ही सुरक्षित स्थान, जैसे – दरवाजे के नीचे/ बिस्तर के नीचे/ मजबूत टेबल के नीचे या दीवार के कोनों की ओर चिपक के खड़े हो जाएँ.
  • भूकम्प के दौरान ; अगर गाड़ी चला रहे हैं, तो तुरंत गाड़ी खड़ी कर बाहर निकल जाएँ. और सुरक्षित स्थान की ओर चले जाएँ.
  • खुले मैदान में किसी बहुमंजिला ईमारत के पास भी खड़े न हों.

ये सभी भूकंप से बचने के उपाय हैं. जिनका उपयोग करके आप अपनी जान बचा सकते हैं.

निष्कर्ष

तो देखा आपने; भूकंप क्यों आता है? और किस प्रकार प्लेट विवर्तिनिकी का सिद्धांत, भूकंप के कारण की सही व्याख्या करता है. साथ ही ; आपने भूकम्प के प्रभाव और भूकंप से बचने के उपाय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी हासिल की.

आशा है; आपको इस आर्टिकल से जरुर कोई नवीन जानकारी मिली होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे, तो Please नीचे comment करके बताये. और इसे अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें. ताकि उन्हें भी यह नवीन जानकारी मिल सके.

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F&Q

भूकंप मूल (Focus) या “Hypocenter” किसे कहते हैं ?

पृथ्वी के अन्दर ; जिस स्थान से , सबसे पहले भूकंप की उत्पति होती है, उस स्थान को भूकंप मूल (Focus) या “Hypocenter” कहा जाता है.

अधिकेन्द्र (Epicenter) किसे कहते हैं ?

पृथ्वी के बाहर धरातल पर; भूकंप मूल के ठीक ऊपर का स्थान, जहाँ पर भूकंप का सबसे पहले अनुभव किया जाता है, उसे अधिकेन्द्र (Epicenter) कहते हैं.

सम्भूकम्पीय रेखा (Isoseismal Line) किसे कहते हैं ?

जिन -जिन क्षेत्रों में ; समान तीव्रता के भूकंप आते हैं , उन क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा ,सम्भूकम्पीय रेखा (Isoseismal Line) कहलाती है.

सह्भूकम्पीय रेखा (Homoseismal Line) किसे कहते हैं?

जिन – जिन क्षेत्रों में ; एक समय पर भूकंप आते हैं, ( मान लीजिये 04:00 बजे जिन जिन क्षेत्रों में भूकंप आया होगा ) उन क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा , सह्भूकम्पीय रेखा (Homoseismal Line) कहलाती है.

विनाशी प्लेट सीमान्त (Destructive Plate Margin) किसे कहते हैं?

जब दो प्लेटें एक – दूसरे की ओर आकर टकराती हैं. तो उसे विनाशी प्लेट सीमान्त (Destructive Plate Margin)कहते हैं.

रचनात्मक प्लेट सीमान्त (Constructive Plate Margin) किसे कहते हैं?

जब दो प्लेटें एक – दूसरे से दूर जाती हैं. तो उसे रचनात्मक प्लेट सीमान्त (Constructive Plate Margin) कहते हैं.

भूकंपीय तरंगों को कौन मापता है?

सीस्मोग्राफ (Seismograph) – यह यंत्र भूकंपीय तरंगों को मापता है.

रिक्टर स्केल के द्वारा क्या मापा जाता है?

भूकंप के दौरान; पृथ्वी के अन्दर से, जितनी ऊर्जा बाहर आती है. उस ऊर्जा की मात्रा को भूकंप का परिमाण कहते हैं. इसे रिक्टर स्केल द्वारा मापा जाता है.

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जानिए क्यों आता है भूकंप ? और कैसे पता लगाते हैं कि भूकंप की शुरुआत (Epicenter) पृथ्वी के किस हिस्से से हुई है?
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जानिए क्यों आता है भूकंप ? और कैसे पता लगाते हैं कि भूकंप की शुरुआत (Epicenter) पृथ्वी के किस हिस्से से हुई है?
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इस आर्टिकल में आप जान सकेंगे कि, भूकंप क्यों आता है ? कैसे वैज्ञानिक यह पता लगा पाते हैं कि; भूकंप की शुरुआत (अधिकेन्द्र - Epicenter), पृथ्वी के किस हिस्से से हुई है ? क्या P और S तरंगों का भूकंप के अधिकेन्द्र (Epicenter) से कोई सम्बन्ध है ? अभी हाल में; म्यामांर में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका अधिकेन्द्र (Epicenter) म्यामांर के खामपट से 68 किमी दूर था. आखिर कैसे; इसका पता चला कि, यह भूकंप खामपट से 68 किमी दूर था ?
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GEO FACTS

This Post Has 12 Comments

  1. Nn

    Great information 👍👍👍

  2. Anonymous

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  3. Anonymous

    Nice👍

  4. Anonymous

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  5. Dr Sharad Visht

    Wao, Dr Ashutosh, is there any other better device developed to measure earthquake? Thank you

  6. Anonymous

    Thanks a lot for sharing such wonderful information in a very simple manner. 👍👍👍

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