विश्व वन्यजीव दिवस क्यों मनाया जाता है? विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम क्या है? (World Wildlife Day In Hindi)

विश्व वन्यजीव दिवस क्यों मनाया जाता है? विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम क्या है? (World Wildlife Day In Hindi)

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इस अर्टिकल में आप जानेंगे कि; विश्व वन्यजीव दिवस, हर साल क्यों मनाया जाता है? आखिर विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण की आजमाइश क्यों चल रही है? क्या वाकई में ! दुनिया के वन्यजीवों पर संकट आ गया है? क्या इसका सम्बन्ध ग्लोबल वार्मिंग और बदते प्रदूषण से है?

इसके अतिरिक्त आप यह भी जान सकेंगे कि, 2021 के लिए वन्यजीव दिवस की थीम क्या है? कैसे यह UN के सतत विकास लक्ष्यों में शामिल हो गया? और कैसे CITES के द्वारा जीवों को “विलुप्त होती प्रजातियों” के अंतर्गत शामिल किया जाता है? आइये विस्तार से जानते हैं –

विश्व वन्यजीव दिवस

यह विश्व स्तर पर, वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अपनाया जाने वाला, कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम की शुरुआत; 20 दिसम्बर 2013 को हुई, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 68वें सत्र में CITES (The Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) को विश्व वन्यजीव दिवस को मनाने का दिन निर्धारित करने का निर्णय लिया था. इसीलिये; 03 मार्च को प्रतिवर्ष, यह कार्यक्रम मनाया जाता है. इस कार्यक्रम को मनाने का प्रस्ताव थाईलैंड के द्वारा दिया गया था.

क्यों मनाया जाता है विश्व वन्यजीव दिवस

इसके मुख्य उदेश्य इस प्रकार है –

  • दुनिया के वन्य जीवों और वनस्पतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना.
  • वन्यजीवों और वनस्पतियों का संरक्षण करना.
  • जीवों के पारिस्थितिकी का अध्ययन करना.
  • वन्यजीवों के अनुवांशिकी का अध्ययन करना.
  • वन्यजीवों और वनस्पतियों की विलुप्त होती प्रजातियों के बारे में जागरूकता फैलाना.

विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम

विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम है – “Forests and Livelihoods : Sustaining People and Planet”

अभी तक मनाये गए कार्यक्रम की थीम –

YearMain ThemeSub Theme
2015“It’s time to get serious about wildlife crime”
2016“The future of wildlife is in our hands” “The future of elephants is in our hands”
2017“Listen to the young voices”
2018“Big cats – predators under threat”
2019“Life below water: for people and planet”
2020“Sustaining all life on earth”

विलुप्त होती प्रजातियाँ

संसार भर में जीवों और वनस्पतियों की कई प्रजातियाँ समाप्त हो गयी हैं. परन्तु यह एक सामान्य सी बात है.

क्यूंकि;

एक अनुमान के मुताबिक; कोई भी प्रजाति, अस्तित्व में आने के 1 करोड़ साल बाद विलुप्त हो जाती है.

और; किसी समय में विद्यमान लगभग 99 % प्रजातियाँ, आज समाप्त भी हो गयी हैं.

तो फिर इतना परेशानी की बात क्यों है?

दरअसल; वर्तमान समय में मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीन हाउस प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की समस्या जिस तरह से बड़ी है. उसके कारण; प्रजातियों के विलुप्त होने की रफ़्तार में इजाफा हुआ है.

तो सामान्यतः; प्रजातियों के विलुप्त होने में, जितना समय लगता था. उससे कई गुना अधिक रफ़्तार में प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं. यही चिंता का विषय है.

विलुप्त होती प्रजातियों का निर्धारण

IUCN (International Union for conservation of Nature); दुनिया भर में विलुप्त हो चुके जीव या संकटापन्न स्थिति में रहने वाले जीवों की एक list तैयार करता है. IUCN; यह list, अपनी किताब – “The IUCN Red List of Threatened Species” में जारी करता है.

IUCN; विश्व स्तर पर, जीवों की प्रजातियों पर निगरानी रखने और उन्हें संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से बनायीं गयी संस्था है. इसका गठन 1964 में हुआ था.

IUCN के द्वारा निर्धारित श्रेणियां

दुनिया भर के जीवों की प्रजातियों को; IUCN, निम्न 9 में से किसी 1 श्रेणी में रखता है . IUCN के द्वारा निर्धारित श्रेणियां निम्न हैं –

"IUCN लाल सूची श्रेणी"
  1. विलुप्त (Extinct या Ex) – कोई भी सदस्य जीवित नहीं है.
  2. वन-विलुप्त (Extinct In the wild या EW) – इसके सदस्य; वनों से पूरी तरह से समाप्त हो गए हैं. ये अब केवल चिड़िया घर में ही बचे हुए हैं.
  3. घोर संकटग्रस्त (Critically Endangered या CR) – इस जाति के जीवों का, वनों से विलुप्त होने का घोर खतरा सबसे अधिक बना हुआ है.
  4. संकटग्रस्त (Endangered या EN) – इसके सदस्यों का वनों से विलुप्त होने का खतरा सबसे अधिक बना हुआ है.
  5. असुरक्षित (Vulnerable या VU) – इस जाति के सदस्यों की वनों में संकटग्रस्त हो जाने के संभावना अधिक है.
  6. संकट-निकट (Near-Threatened या NT) – इसके सदस्यों की निकट भविष्य में संकटग्रस्त हो जाने की संभावना है.
  7. संकट-मुक्त (Least Concern या LC) – इसके सदस्यों को खतरा बहुत कम है.
  8. आंकड़ों का अभाव (Data Deficient या DD) – इस प्रजाति के जीवों के बारे में जानकारी के अभाव में, इसके संरक्षण और संकट का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है.
  9. अनाकलित (Not Evaluated या NE) – इस प्रजाति के जीवों के संरक्षण का आंकलन अभी नहीं किया गया है.

विलुप्त प्रायः जीवों की सूची

IUCN के द्वारा विलुप्त प्रायः जीवों की सूची इस प्रकार है.

घोर संकटग्रस्त (Critically Endangered)

1. Himalayan Brown Bear

यह उत्तर पश्चिम भारत में जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाते हैं. ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस प्रजाति का आवास खतरे में हैं.

2. Andaman White-Toothed Shrew

यह दक्षिणी अंडमान में पाया जाने वाला जीव . जलवायु परिवर्तन और सुनामी जैसी आपदा के कारण यह प्रजाति खतरे में है.

3. Elvira Rat

यह विशेष प्रजाति का चूहा केवल भारत के तमिलनाडु और पूर्वी घाट में पाया जाता है. यह प्रजाति, मानव गतिविधियों के कारण संकटापन्न स्थिति में पहुँच गयी है.

4. Malabar Civet

इसे कस्तूरी बिलाव कहते हैं. यह बिल्ली जैसे दिखाई देता है. परन्तु; यह बिल्ली प्रजाति का जीव नहीं है. यह एशिया और अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है. सुगन्धित पदार्थों में इसके शरीर से निकलने वाले रसायन का प्रयोग किया जाता है. इसके अवैध शिकार के कारण यह प्रजाति संकट में है.

5. Kashmir Hangul

यह भारत के कश्मीर में पाई जाने वाली प्रजाति है. यह लाल हिरन के नस्ल की है. अवैध शिकार के कारण यह प्रजाति आज संकट में है.

6. Pygmy Hog

यह सूअर की प्रजाति का जीव है. यह विशेष रूप से असम में पाया जाता है. यह दुनिया का सबसे छोटा सूअर है. असम के गुआहाटी में इसके संरक्षण के लिए एक विशेष चिड़ियाघर का निर्माण किया गया है.

7. Kondana Soft-Furred Rat

यह भारत के महाराष्ट्र और पुणे में पाया जाने वाला जीव है. यह जीव; बढते पर्यटन के कारण, अपने आवास को खो रहा है.

8. Namdapha Flying Squirrel

इसे उड़ने वाली गिलहरी कहते हैं. भारत में इसकी 12 प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

संकटग्रस्त (Endangered)

1. Tiger

यह भारत, नेपाल, भूटान और इण्डोनेशिया में अधिक पाया जाता है. जबकि, तिब्बत, श्रीलंका और अंडमान द्वीप समूह में नहीं पाया जाता है. अपने सुनहरे धारीदार शरीर के कारण यह शिकारियों के निशाने पर अधिक रहता है. जिस कारण आज यह प्रजाति विलुप्ति के कगार पर है.

2. Red Panda

यह भारत, नेपाल, भूटान के हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है.

3. Eld’s Deer

यह भारत के मणिपुर राज्य में पाया जाता है. यह हिरन की प्रजाति का जीव है; जो कि संकटापन्न स्थिति में है.

4. White Bellied Musk Deer

यह उत्तराखंड राज्य का राज्य पशु है. अपनी कस्तूरी के कारण यह शिकारियों की नजर में रहता है.

5. Hog Deer

यह संकटापन्न हिरन प्रजाति का जीव है. यह उत्तरी भारत से लेकर दक्षिणी पूर्वी एशिया तक पाया जाता है.

6. Nilgiri Tahr

यह भारत के नीलगिरी पर्वत और पश्चिमी घाट में पाया जाने वाला जीव है. यह जंगली भेड़ से मिलता जुलता जीव है. यह संकटग्रस्त प्रजाति का जीव है.

7. Asiatic Lion

यह एशियाई शेर गुजरात के गिर जंगलों में पाया जाता है. हालाँकि यह एक संकटापन्न प्रजाति का जीव है. परन्तु; हाल ही में इसकी संख्या में बढ़ोतरी देखी गयी है.

8. Golden Langur

यह विशेष प्रजाति का बन्दर केवल भारत और भूटान में पाया जाता है. यह विलुप्त प्रायः जीवों की श्रेणी में आता है. हाल ही में ये चर्चा के केंद्र में रहे थे. क्यूंकि; इन बंदरों में गर्भपात की स्थिति उत्पन्न हो रही थी.

9. Kharai Camel

इस प्रजाति के ऊंट केवल गुजरात के भुज में पाए जाते हैं. इन्हें तैरने वाले ऊंट के नाम से भी जाना जाता है.

निष्कर्ष

तो देखा आपने; कि आखिर, दुनिया भर में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किस प्रकार प्रयास किये जाते हैं? मानवीय गतिविधियों के कारण ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण, प्रजातियां बहुत तेजी से विलुप्त हो रही हैं. इन्ही विलुप्त होती प्रजातियों के संरक्षण के लिए दुनिया भर में यह दिवस मनाया जाता है.

आशा है; आपको इस आर्टिकल से जरुर कोई नवीन जानकारी मिली होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे, तो Please नीचे comment करके बताये. और इसे अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें. ताकि उन्हें भी यह नवीन जानकारी मिल सके.

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विश्व वन्यजीव दिवस क्यों मनाया जाता है? विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम क्या है? (World Wildlife Day In Hindi)
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विश्व वन्यजीव दिवस क्यों मनाया जाता है? विश्व वन्यजीव दिवस 2021 की थीम क्या है? (World Wildlife Day In Hindi)
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इस अर्टिकल में आप जानेंगे कि; विश्व वन्यजीव दिवस, हर साल क्यों मनाया जाता है? आखिर विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण की आजमाइश क्यों चल रही है? क्या वाकई में ! दुनिया के वन्यजीवों पर संकट आ गया है? क्या इसका सम्बन्ध ग्लोबल वार्मिंग और बदते प्रदूषण से है?
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Geo Facts

This Post Has 2 Comments

  1. Dr Sharad

    Very informative Dr Ashutosh. Hope you will enlighten us with so peculiar information. Thank you.

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