देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कैसे मनाई जाती है होली !

देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कैसे मनाई जाती है होली !

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भारत के विभन्न राज्यों में मनाई जाने वाली होली के रिवाज

  • उत्तराखंड – खड़ी होली, बैठकी होली, महिला होली
  • वृंदावन – फूलों की होली
  • बृज – लट्ठमार होली
  • बिहार – फगुआ
  • राजस्थान – नुक्कड़ नाटको वाली
  • हरियाणा – धुलेंडी
  • फैलान – अंगारों पर चलने वाली

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मनाये जाने वाली होली

  1. स्पेन – ला टोमाटीना
  2. चीन – पानी छपाका
  3. रोम – रेडिका
  4. अफ्रीका – ओमेन बोगा

होली खुशियों का त्यौहार है. इस ख़ुशी के लिए; ना तो किसी डिग्री की जरुरत होती है; और ना ही, पैसों की. बस दिल में उमंग हो; होंठो पे मुस्कान हो, तो समझ लेना कि, बंदा खुश नसीब है. और हम ज्यादा खुशनसीब भी इसलिए हैं; क्योंकि हम सभी, भारतीय हैं. हमारा जन्म भारत में हुआ है.

भाई ! हमारे देश की तो बात ही अलग है. यहाँ साल में दिन तो होते हैं – 365. लेकिन; त्यौहार मनाये जाते हैं – 366. महीने की संक्रांति से लेकर, हफ्ते के सातों दिन, किसी न किसी भगवान जी की बुकिंग fix होती है. कहने का मतलब है; हम त्योहारों के रूप में, पर्व के रूप में और दिनों के रूप में, किसी भी प्रकार से खुशियाँ ढूंड ही लेते हैं. इसीलिए हम भाग्यशाली हैं.

और होली का पर्व भी – खुश होने और खुशियाँ बाँटने का एक माध्यम है.

भारत चूँकि; धर्म, भाषा और संस्कृति में बहुत विविध है. इसीलिए ख़ुशी को मनाने के तरीके भी यहाँ अलग अलग हैं. रंग-गुलाल और गुझिया तो; होली में, बहुत ही common हैं. सोचो; अगर गुझिया के साथ साथ लाठियां भी खानी पड़े तो कैसा लगे ! अगर पानी के बजाय; कोई गर्म अंगारे डाल दे, तो कैसा लगेगा.

आज हम इस आर्टिकल में यही सब जानेगे कि; भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, होली का अंदाज किस प्रकार मनाया जाता है. और क्या भारत से बाहर, दुनिया के अलग अलग देशों में भी होली को मनाया जाता है? क्योंकि होली खुशियों का त्यौहार है; और ख़ुशी मनाने का सबका अलग अंदाज होता है. आइये जानते हैं.

Table of contents

उत्तराखंड में मनाई जाती है – 1 महीने की होली (कुमाऊं की खड़ी और बैठकी होली)

माना कि; होली ख़ुशी का पर्व है. लेकिन; इतनी ख़ुशी !! पूरे 1 महीने तक. ये तो अपने आप में आश्चर्य जनक है. और यही आश्चर्य; उत्तराखंड की होली को बहुत special बनाता है.

उत्तराखंड के कुमाऊ में बसंत पंचमी (माघ महीने) से ही होली की शुरुआत हो जाती है. जबकि; पूरे देश में 1 महीने बाद फाल्गुन महीने में होली मनाई जाती है.

कुमाऊं की होली

कुमाऊं में; 03 प्रकार की होली मनाई जाती है.

  1. बैठकी होली
  2. खड़ी होली
  3. महिला होली

कुमाऊं की होली में; रंग गुलाल के साथ साथ शास्त्रीय गायन की परम्परा, शामिल है. बैठकी होली सबसे पहले (बसंत पंचमी से) शुरू होती है. इसमें लोग अपनी खुशियों को गीतों के जरिये प्रकट करते हैं. चौपाल लगा कर; हारमोनियम और तबले के साथ, बैठ कर गीत गाते हैं. इसमें रंगों का प्रयोग नहीं होता है. केवल होता है – ठुमरी और नृत्य.

ठुमरी ; भारतीय शास्त्रीय संगीत को, गाने की एक शैली होती है.

ठुमरी को गाने वाले को कहते हैं – होल्यार. इसमें; बैठकी होली में शामिल कोई भी होल्यार, बंदिश लगा सकता है. इसे भाग लगाना कहते हैं.

"बैठकी होली का एक दृश्य"
“बैठकी होली में भाग लेते होल्यार”

खड़ी होली, इसके बाद शुरू होती है. इसमें गांव के मुख्य प्रांगण में, लोग गोल घेरे में इकठा होते हैं. इस घेरे के बीच में होता है – इनका मुखिया. जो कि; होली के मुखड़े को गाता है, बाकी सभी लोग, उसे दोहराते हैं. इसमें लोग गाते हैं, नाचते हैं और रंग गुलाल लगाते हैं.

इन होल्यारों के द्वारा गाये जाने गीतों की कुछ लाइने इस प्रकार हैं –

झनकारो झनकारो झनकारो 
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो झनकारो
तुम हो बृज की सुन्दर गोरी, मैं मथुरा को मतवारो 
चुंदरी चादर सभी रंगे हैं, फागुन ऐसे रखवारो.

महिला होली भी खड़ी होली की तरह ही है. लेकिन; इसमें केवल महिलाएं भाग लेती हैं.

"महिला होली की तस्वीर"
“महिला होली में भाग लेती महिलाएं”

कुमाऊं में चीर लगाने/चीर चुराने की प्रथा

चीर लगाने की प्रथा; दरअसल होलिका दहन की तरह ही है. इसमें; चीड़ के एक लम्बे सीधे लांग (पेड़) पर रंग बिरंगे कपड़ों के टुकड़े लगा दिए जाते हैं. जिन्हें स्थानीय भाषा में चीर लगाना कहा जाता है.

चीर लगाने के बाद; प्रत्येक गाँव के लोग, अपने-अपने चीर की रक्षा में लग जाते हैं. क्यूंकि; दूसरे गाँव के लोग, चीर को चुराने का प्रयास भी करते हैं. होलिका दहन के दिन; चीर को जला दिया जाता है.

वृंदावन की होली: फूल बरसाने वाली

होली का नाम आये; और वृंदावन का जिक्र ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. वृंदावन; वो पावन स्थल है, जहाँ भगवान् श्री कृष्ण ने, राधा और गोपियों संग रास लीला रचाई है. इसीलिये; भगवान श्री कृष्ण के साथ होली खेलने का आनंद, अपने आप में अविस्मरणीय है.

वृन्दावन में होली – फूलों के साथ खेली जाती है.

वृंदावन में यह उत्सव 7 दिनों तक चलता है. एकादशी के दिन से ही होली शुरू हो जाती है. कृष्ण और राधा के मंदिरों में, एक-दूसरों पर फूल बरसाए जाते हैं. उल्लास के साथ साथ माहौल; कब भक्तिनुमा हो जाता है, पता ही नहीं चलता. समझ में नहीं आता; कि आनंद का यह भाव, त्यौहार के कारण है या ये, श्री कृष्ण की महिमा है.

इस दिन बांके बिहारी मंदिर में; बांके बिहारी जी की मूर्ति को, मंदिर के बाहर रख दिया जाता है. ऐसा लगता है; मानों भगवान, स्वयं अपने भक्तों के साथ होली खेलने बाहर आ गए हों.

बृज की होली : लट्ठ बरसाने वाली

बृज का स्थान; सभी स्थानों में, सर्वोपरि है. यहाँ पर इस उत्सव को, श्री कृष्ण और राधा के प्रेम के रूप में जोड़ कर देखा जाता है. यहाँ पर होली विशेष तरीके से खेली जाती है.

बृज की होली – लाठियों से खेली जाती है.

दरअसल; इस होली में नन्दगांव के पुरुष और बरसाने की महिलाएं भाग लेती हैं. नंदगांव के पुरुष; बरसाने की महिलाओं पर रंग लगाने जाते हैं. जहाँ पर उनका स्वागत; बरसाने की महिलाएं, लाठियों से करती हैं. वह नंदगांव के पुरुषों को लाठियों से मारती हैं. परन्तु; इसमें किसी को चोट नहीं लगती है. इसके अलावा भांग की ठंडाई जमकर पी जाती है.

बिहार की होली : विशिष्ट गायन शैली वाली (फगुआ)

बिहार में यह उत्सव तीन दिन तक चलता है. वहां इसे फगुआ कहा जाता है.

फगुआ, गायन की विशिष्ट शैली है.

बिहार में पहले दिन होलिका दहन होता है. दुसरे दिन, उसी की राख से होली खेलते हैं. तीसरे दिन, रंग और गुलाल से होली खेलते हैं.

राजस्थान की होली : नुक्कड़ नाटकों वाली

राजस्थान अपनी विशिष्ट संस्कृति के लिए जाना जाता है. राजा, रजवाड़े और उनकी परम्पराओं को संजोए हुए राजस्थान में, होली के दिन नुक्कड़ नाटक किये जाते हैं.

कलाकार, रंगमंच प्रेमी, इस दिन शहर के अलग अलग हिस्सों में नाटकों के जरिये, अपनी संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं. ये नाटक, पौराणिक कथाओं से प्रेरित होते हैं.

हरियाणा की होली : मार पिटाई वाली (धुलेंडी)

हरियाणा का जिक्र हो; और मार पिटाई का नाम ना आये, ऐसा हो ही नहीं सकता. यहाँ की तो भाषा ही लट्ठमार वाली है. तो त्यौहार इससे अछूते कैसे रह सकते हैं. लेकिन; होली के दौरान, इस मार पिटाई का भाव, प्रेम रस लिए होता है.

यहाँ की होली भी लट्ठमार होली की तरह ही होती है. परन्तु; इसमें थोडा अंतर होता है.

इस दिन भाभियां; अपने देवर को, लाठी डंडों से पीटती हैं.

दरअसल; भाभी-देवर के बीच, एक बहुत ही मैत्री पूर्ण सम्बन्ध होता है. जिसमे हंसी मजाक सभी कुछ चलता है. देवर के द्वारा; साल भर की गयी हंसी मजाक का बदला, इस दिन लिया जाता है. शाम को; मार खाने के बाद, देवर, भाभी को मनाने आता है. तथा भाभियाँ उन्हें आशीर्वाद भी देती हैं.

मथुरा के फैलान गांव की होली : अंगारों पर चलने वाली

यूँ तो होली रंगों और पानी से खेलने का त्यौहार है. लेकिन; भारत में एक गांव ऐसा भी है, जहाँ पानी के बजाय गर्म अंगारे का प्रयोग किया जाता है.

लेकिन; होली के इस त्यौहार पर, अंगारों पर चलने की क्या जरूरत है?

दरअसल; मथुरा का फैलान गांव, भक्त प्रह्लाद का गांव माना जाता है. ये वही प्रहलाद है, जिसे मारने के लिए, होलिका स्वयं आग में जलकर भस्म हो गयी थी.

अतः; भक्त प्रह्लाद के सम्मान में, इस गाँव का पंडा, गर्म अंगारों पर चलता हैं. ऐसा करने से पूर्व, पंडा को, नियम बद्ध होकर पूजा करनी होती है.

"मथुरा के फैलान गांव की होली"
“मथुरा के फैलान गांव में अंगारों पर चलता पांडा”

दुनिया के अलग अलग देशों में मनाई जाने वाली होली

होली एक दुसरे के साथ खुशियाँ बाँटने का त्यौहार है. चूँकि; दुनिया में अलग अलग सभ्यताओं के देश हैं. इसीलिए; उनके द्वारा मनाया जाने वाला यह उत्सव भी काफी अलग होता है. आइये जानते हैं कि; भारत के अतिरिक्त दुनिया भर में यह पर्व कैसे मनाया जाता है.

मिस्र के आदिवासियों की होली : अंगारों वाली

मिस्र के आदिवासी भी अंगारों से होली खेलते हैं. ये मार्च के तीसरे सप्ताह में यह उत्सव मनाते हैं. इस दिन ये आदिवासी; जंगल में एकत्रित होते हैं और अपने पूर्वजों के बाल और कपडे जलाते हैं. इसी आग के अंगारों को भी एक दुसरे पर फेंकते हैं.

चीन की होली : पानी छपाका

चीन में मनाई जाने वाली होली को फ़ोश्वेई चेय कहते हैं. इस पर्व पर चीन में 3 दिन का अवकाश घोषित किया जाता है. लोग एक दूसरे पर पानी फेंकते हैं. ऐसा माना जाता है कि; जिस व्यक्ति पर ज्यादा पानी गिरता है, वह उतना ही अधिक भाग्यशाली होता है.

रोम का त्यौहार : रेडिका

रोम में मनाई जाने वाली होली; आजादी के प्रतीक के रूप में, मनाई जाती है. यह देश की स्वतंत्रता के रूप में नहीं है. बल्कि; रोम में बहुत पहले तक दास प्रथा मौजूद थी. परन्तु; इसी रेडिका के दिन, दास-दासियों को एक दूसरे के साथ होली मनाने और अपने मालिकों के साथ हंसी मजाक करने की आजादी थी. अतः इसी दिन की याद में, यह त्यौहार, मई महीने में मनाया जाता है. जो पूरे 1 हफ्ते तक चलता है.

अफ्रीका का त्यौहार : ओमेन बोगा (बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक)

अफ्रीका में मनाया जाने वाला यह उत्सव; बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक, के रूप में मनाया जाता है. मार्च-अप्रैल महीने में मनाया जाने वाला यह उत्सव; बोंगा नामक अत्याचारी राजा के, पुतले को जलाकर मनाते हैं. साथ ही एक दूसरे पर रंग-गुलाल भी लगाते हैं.

स्पेन का त्यौहार: “ला टोमाटीना उत्सव”

ला टोमाटीना; पूरी दुनिया में खेले जाने वाली सभी होलियों में सबसे अधिक प्रसिद्ध है. आखिर यह टमाटर से जो खेली जाती है.

"स्पेन की होली"
“स्पेन की होली: ला टोमाटीना”

यह अगस्त महीने के अंतिम बुधवार को आयोजित किया जाता है. इसमें दुनिया भर से लोग आते हैं. एक दुसरे पर टमाटर मारने से पहले; टमाटर को, हाथों से पिचका दिया जाता है. जिससे; चोट कम लगे.

ला टोमाटीना को मनाने के पीछे बड़ी दिलचस्प कहानी है. सन 1945 में स्पेन के युवा लोग, अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए थे. जब पुलिस; इनको हटाने के लिए आगे बड़ी, तब इन नौजवानों ने, वहां पास में रखे सब्जी की दुकानों से, टमाटर को फेंकना शुरू किया. और तब से लेकर अभी तक यह टमाटर फेंकने का सिलसिला जारी है.

निष्कर्ष

आशा है; आपको इस आर्टिकल से जरुर कोई नवीन जानकारी मिली होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे, तो Please नीचे comment करके बताये. और इसे अपने दोस्तों के साथ share जरुर करें. ताकि उन्हें भी यह नवीन जानकारी मिल सके.

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आज हम इस आर्टिकल में यही सब जानेगे कि; भारत के विभिन्न क्षेत्रों में, होली का अंदाज किस प्रकार मनाया जाता है. और क्या भारत से बाहर, दुनिया के अलग अलग देशों में भी होली को मनाया जाता है? क्योंकि होली खुशियों का त्यौहार है; और ख़ुशी मनाने का सबका अलग अंदाज होता है. आइये जानते हैं.
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Geo Facts

This Post Has 8 Comments

  1. Krishna

    विचित्र जानकारी, बहुत अच्छा

  2. Anonymous

    होली की शुभ

  3. Subodh Gusain

    Very nice👍..Amazing information

  4. Dr Sharad Visht

    Very interesting Dr Ashutosh, as per the brief information it reflect your hard work, efforts & sincerity. Dil garden garden ho Gaya, especially with ला टोमाटीना

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