Antarktika की बर्फ हो रही है – हरे रंग की !

Antarktika की बर्फ हो रही है – हरे रंग की !

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इस आर्टिकल में आप यह जान सकेंगे कि; Antarktika की बर्फ, हरे रंग की क्यों हो रही है? Antarktika; पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव में स्थित है, यह अपने बर्फीले क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध है. परन्तु ; Cambridge University & British Antarktika Survey ने, Antarktika का एक नया मानचित्र तैयार किया है. जिसमें ; Antarktika की बर्फ, हरे रंग की दिखाई दे रही है. वैज्ञानिक इसे; पृथ्वी के लिए, खतरा मान रहे है. आखिर क्यों ? क्या हरियाली भी; इस दुनिया के लिए खतरा साबित हो सकती है ? और उससे भी बड़ा सवाल. क्यों Antarktika की बर्फ हरे रंग की हो रही है? आइये जानते हैं –

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण ने ; यूरोपियन अंतरिक्ष एंजेसी की सेंटिनेल 2 सेटेलाइट के आधार पर, Antarktika का एक मानचित्र तैयार किया. इस मानचित्र में ; Antarktika के प्रायद्वीपीय हिस्से में , शैवालों की संख्या काफी अधिक पाई गई. इनकी संख्या इतनी ज्यादा थी कि ; अंतरिक्ष से , Antarktika का भू भाग , हरे रंग का दिखाई दे रहा था. इसी हरियाली से पर्यावरणविद चिंतित हैं !

Antarktika की स्थिति

हम सभी जानते हैं कि; Antarktika अपने बर्फीले क्षेत्र के लिए, प्रसिद्व है. यह पृथ्वी के; दक्षिणी ध्रुव में स्थित, विश्व का पांचवा सबसे बड़ा महाद्वीप है. यहां का 98 प्रतिशत भू भाग; 1.5 किमी मोटी बर्फ की चादर से, ढका हुआ है. जो कि; पूरी धरती पर मौजूद साफ पानी का 70 प्रतिशत है.

परन्तु; हाल ही में, Antarktika के प्रायद्वीपीय हिस्से में, विभिन्न स्थानों पर, 1679 शैवालों की संख्या देखी गयी थी. जो कि; लगभग 1.9 किमी के क्षेत्र पर फैली है. हांलाकि; यह बहुत कम क्षेत्र पर है, लेकिन; वैज्ञानिक इसे, जलवायु परिवर्तन का कारण मान रहे हैं और यह एक चिंता का विषय है।

चिंता 🤔🤔 BUT, WHY?

Antarktika में पाई जाती है , शैवाल की विभिन्न प्रजातियाँ

लेकिन; Antarktika के प्रायद्वीपीय तट पर, शैवाल की विभिन्न प्रजातियां तो पायी ही जाती हैं. जो कि; नवम्बर से फरवरी के मध्य ग्रीष्मकाल में यहां पर उग आती हैं।

तो इस बार शैवालों की वृद्धि को इतना अधिक Importance क्यों ?

यह बात सही है कि; Antarktika के प्रायद्वीपीय भाग में, विभिन्न प्रकार के शैवालों के अतिरिक्त, टुण्ड्रा वनस्पति भी पायी जाती है. जो कि; 3 माह के छोटे से ग्रीष्मकाल में, उग आती हैं।

लेकिन; इस बार उनकी संख्या इतनी अधिक थी कि, उन्हें अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता था. और; वो तटीय क्षेत्र से, इतना अधिक अन्दर थे कि, उन्होंने बर्फ की सफेद चादर को ही हरा बना दिया था.

आखिर क्या शैवाल खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है?

यह शैवाल; प्रकाश संश्लेषण में वृद्वि करेगी. जिससे; कार्बन के समस्थानिकों का जमाव होने लगेगा, और तापमान में वृद्वि होगी. जिससे बर्फ के पिघलने की रफ्तार; कई गुना बढ़ जायेगी, जो कि दुनिया के अन्य देशों के लिए भी खतरा साबित होगा।

आइये विस्तार से जानते हैं

क्या आपको पता है कि इस धरती पर आक्सीजन कहां से आयी है?

ऑक्सीजन की उत्पत्ति

धरती पर आक्सीजन; सायनोबैक्टीरिया (नीली-हरित शैवाल) के द्वारा, प्रकाश संश्लेषण के कारण आयी. इससे पहले; धरती पर आक्सीजन नहीं थी. प्रकाश संश्लेषण के लिए पौधे; वायुमण्डल की कार्बन डाई आक्साइड को सोखते हैं, और एक रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा आक्सीजन छोड़ते हैं।

जब Antarktika में; शैवालों की संख्या बढ़ेगी. तो यही शैवाल; प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा, वहां की कार्बन डाई आक्साइड को सोखने का काम करेंगे।

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इससे कार्बन इकठ्ठी होने लगेगी

इससे; वहां पर कार्बन के समस्थानिक इकट्ठे होने लगेगे. कार्बन के तीन समस्थानिक होते हैं. 6C12 6C13 6C14 . कार्बन में; एक विशेष गुण पाया जाता है. जिसे कैटिनेशन कहते हैं. इसके कारण; कार्बन के परमाणु आपस में जुड़े हुए रहते हैं. और, एक लम्बी श्रृंखला का निर्माण करते हैं. यही कारण है कि; Antarktika में, कार्बनिक पदार्थों का संचय होने लगेगा।

कार्बन तो आप जानते ही हैं; – पूरा काला होता है. यह सूर्य के प्रकाश का सबसे ज्यादा अवशोषक होता है। मतलब; ये सूर्य की ऊर्जा को, सबसे ज्यादा सोखता है।

ग्लेशियर तेजी से पिघलने लगेंगे

जब Antarktika में; कार्बन का संचय होने लगेगा, तो सूर्य की गर्मी बढ़ने लगेगी. यह गर्मी; वहां के ग्लेशियर के लिए, बिल्कुल सही नहीं है. इससे ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघलने लगेंगे।

अब आप समझ गये होंगे कि Antarktika में बढ़ती शैवाल, वहां के ग्लेशियर के लिए कितना खतरनाक हो सकती है।

एल्बिडो में आयेगी गिरावट

इसके अलावा; बढ़ी हुई शैवाल, ग्लेशियर के चमकते सफेद सतह को, हरे रंग में बदल देगी. जिस कारण; वहां की सतह का एल्बिडो भी, कम हो जायेगा. और कम एल्बिडो से; वहां की सतह, सूर्य की अधिक ऊष्मा को ग्रहण करने लगेगी।

एल्बिडो ; किसी भी वस्तु की सतह से, सूर्य के प्रकाश के परावर्तन की मात्रा को प्रकट करती है.

जैसे – ताजे बर्फ का एल्बिडो सबसे अधिक होता है. इसका अर्थ है कि;ताजे बर्फ से सूर्य का प्रकाश ,सबसे ज्यादा परावर्तित होता है.जबकि ; पेड़-पौधों का एल्बिडो , उससे कम होता है.

इसीलिए ;सफेद चमकीली सतह की तुलना में, हरी शैवाल युक्त सतह से ,सूर्य की कम ऊर्जा परावर्तित होगी. और ;अधिकांश ऊर्जा को यह सोख लेगा।

इस प्रकार हम देखते हैं कि शैवालों की मात्रा में वृद्वि से

  • प्रकाश संश्लेषण की वृद्वि होगी,
  • जिससे कार्बन के समस्थानिक एकत्रित होने लगेंगे,
  • इससे तापमान में वृद्वि होने लगेगी,
  • जिस कारण ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघलने लगेंगे।

निष्कर्ष

ग्लेशिर के तेजी से पिघलने के कारण; विश्व के अधिकांश द्वीपीय देश और तटवर्ती क्षेत्र, पानी में डूब जायेंगे. एक तो वैसे ही Global Warming के कारण; ग्लेशियरों के पिघलने की दर काफी अधिक है. ऊपर से; शैवालों की बढ़ती संख्या, इसमें आग में घी डालने का काम करेंगी।

यही कारण है कि; वैज्ञानिक, इस पर काफी अधिक चिंतित हैं. हांलाकि; अभी यह, केवल 1.9 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर फैला है. परन्तु ; यदि इसकी वृद्वि दर को रोका न गया तो, यह बहुत तेजी से पूरे Antarktika महाद्वीप में फैल सकता है.

Top FAQ for Antarktika

धरती पर सबसे पहले ऑक्सीजन की उत्पति कैसे हुई?

साइनोबैक्टीरिया के द्वारा . साइनोबैक्टीरिया प्रकाश संशलेषण के माध्यम से वायुमंडल में ऑक्सीजन को उत्सर्जित करता है.

Antarktika में carbon के जमाव के कारण ग्लेशियर के ऊपर कैसा असर होगा?

ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघलने लगेंगे. क्यूंकि कार्बन सूर्य की ऊष्मा को अवशोषित करता है.

क्या एल्बिडो में कमी से बर्फ के पिघलने की रफ़्तार तेज़ होगी?

जी हाँ.

मुझे पूरी उम्मीद है कि; इस आर्टिकल के माध्यम से आपको काफी नयी जानकारी मिली होगी. यह आर्टिकल आपको कैसे लगा ? Please नीचे comment box में comment करके बताएं. Please इस आर्टिकल को Like 👍 करें. इसे अपने दोस्तों के साथ Share करें.

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