International Charter Space and Major Disasters (इंटरनेशनल चार्टर स्पेस एंड मेजर डिसास्टर्स)

International Charter Space and Major Disasters (इंटरनेशनल चार्टर स्पेस एंड मेजर डिसास्टर्स)

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उत्तराखंड में स्थित त्रिशूल पर्वत शिखर पर दिनांक 07/02/2021 को हुए हिमस्खलन में भारत की ISRO ने अंतर्राष्ट्रीय चार्टर को लागू किया था. जिसके कारण अमेरिका की प्राइवेट सेटेलाइट कम्पनी “Planet Lebs” की सेटेलाइट इमेज का प्रयोग किया गया था. क्या यह केवल एक भाईचारा था, या कुछ और ? आखिर ये इंटरनेशनल चार्टर क्या है? और क्या कोई भी देश, किसी दूसरे देश की सेटेलाइट का प्रयोग कर सकता है? आइये जानते हैं –

“उत्तराखंड के त्रिशूल पर्वत पर दिनांक 07/02/2021 को भारी हिमस्खलन हुआ; जिस कारण ऋषि गंगा में अचानक बाड़ आने से , 200 से अधिक लोग लापता हो गए. “

अंतरिक्ष कार्यक्रम

अन्तरिक्ष कार्यक्रम के द्वारा कोई भी देश अपने संसाधनों को मापने के लिए सेटेलाइट का प्रयोग करता है. यह सेटेलाइट; सरकारी संस्थाओं द्वारा या प्राइवेट संस्थाओं द्वारा अंतरिक्ष में भेजा जाता है. कभी कभी आवश्यकता पड़ने पर दूसरे देशों की सरकारी या प्राइवेट संस्थाओं का प्रयोग भी किया जाता है.

अभी तक ज्ञात जानकारी के अनुसार विश्व में 72 सरकारी अन्तरिक्ष संस्थाएं कार्य कर रही हैं.

Top 10 Space Agency in the World

Space AgenciesCountries
NASA (National Aeronautics and Space Administration)U.S.A.
CNSA (China National Space Administration)China
ESA (European Space Agency)European Nation
ROSCOSMOS (Russian Federal Space Agency)Russia
ISRO (Indian Space Research Organization)India
Space X (Private Space Agency)U.S.A.
JAXA (Japan Aerospace Exploration Agency)Japan
DLR (German Aerospace Center)Germany
ASI (Italian Space Agency)Italy
FSA (French Space Agency)France

प्रत्येक एजेंसी अपने सेटेलाइट के आंकड़ों का प्रयोग निजी तौर पर करते हैं. दूसरे देशों और संस्थाओं के द्वारा; इन आंकड़ो का प्रयोग करने पर, सम्बंधित एजेंसी को भुगतान करना होता है.

International Charter Space and Major Disasters

यह चार्टर; विश्व के space agencies के बीच, अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर किया गया एक समझौता है. जिसमें यह सदस्य देशों के मध्य किसी भी आपदा या आपातकालीन परिस्थितियों में सेटेलाइट आंकड़ों को निशुल्क आदान प्रदान करेंगे.

उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए हिमस्खलन की वास्तविक और सही image के लिए इसी International charter के अंतर्गत अमेरिका की प्राइवेट सेटेलाइट कम्पनी “Planet Lebs” की सेटेलाइट इमेज का प्रयोग किया गया था. क्यूंकि; उस वक़्त यह सेटेलाइट चमोली जिले के ऊपर से गुजर रहा था.

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International Charter की स्थापना

इसका अस्तित्व जुलाई 1999 में ऑस्ट्रिया के वियाना में आयोजित UNISPACE -III सम्मलेन में सामने आया. यह सम्मलेन European Space Agency तथा French Space Agency ने आयोजित किया था.

परन्तु; यह चार्टर नवम्बर 2000 से औपचारिक रूप से लागू हुआ.

International Charter के सदस्य देश

  • केवल वही संस्थाएं इस चार्टर के सदस्य होंगे; जो पृथ्वी के संसाधनों के सेटेलाइट आंकड़ों का संग्रह करते हैं. इस आधार पर; इस चार्टर के केवल 17 सदस्य (ISRO सहित) हैं. जबकि पूरे विश्व में 72 सरकारी तथा अन्य प्राइवेट अन्तरिक्ष संस्थाएं कार्य कर रही हैं.
  • ये सभी सदस्य स्वैछिक आधार पर आपस में सहयोग करते हैं. ऐसा करने के लिए ये किसी भी प्रकार से बाध्य नहीं हैं.
  • UNOOSA / UN – SPIDER और UNITAR / UNOSAT इसके औपचारिक सदस्य नहीं हैं. परन्तु; UN एजेंसीज की तरफ से इन्हें यह अधिकार है कि, आपातकाल में यह चार्टर को लागू कर सकती है.

International Charter काम कैसे करता है ?

International Charter को लागू करने के लिए निम्न चरणों से गुजरना होता है

1. Authorized Users (अधिकृत उपयोगकर्ता)

अधिकृत उपयोगकर्ता ही केवल इस चार्टर की सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं.

  • वे देश; जिनकी अंतरिक्ष संस्थाएं , चार्टर के सदस्य हैं, इसका उपयोग करने के लिए अधिकृत हैं.
  • AU (Authorized Users) के निवेदन पर यह चार्टर लागू किया जाता है.
  • भारत की अन्तरिक्ष संस्था ISRO भी International Charter का सदस्य है. इसीलिए भारत सरकार के अनुरोध पर ISRO ने इस चार्टर को लागू किया.

2. Conditions For Activation (लागू करने की शर्तें)

यह चार्टर हर परिस्थिति में लागू नहीं होता है. यह केवल तभी लागू होता है; जबकि,

  • यह चार्टर केवल तेजी से घटित होने वाली आपदाओं; जैसे – बाढ़, सुनामी, भूकंप आदि में लागू किया जायेगा.
  • धीरे धीरे घटित होने वाली आपदाओं ; जैसे – सूखा आदि में लागू नहीं किया जायेगा.
  • यह चार्टर आपदा के घटित होने के 10 दिन के भीतर लागू किया जायेगा.

3. Request For Activation ( निवेदन की प्रक्रिया)

इसके लिए उपयोगकर्ता को निम्न प्रक्रिया पूरी करनी होती है –

  • AU (Authorized Users) एक गोपनीय मोबाइल नंबर पर कॉल करते हैं. यह नंबर पूरे साल भर 24 * 7 घंटे चालू रहता है.
  • इसके अलावा AU; निवेदन पत्र को email या fax के माध्यम से भेजते हैं.
  • On – Duty Operator इस निवेदन प्रक्रिया की जांच करते हैं. और इसे Emergency On – Call Officer को तुरंत सूचित करते हैं.
  • AU (Authorized Users) को यदि अन्य बेहतर सहायता मिलती है; तो उसे अपने निवेदन को वापस लेने का अधिकार भी है.

4. Process (प्रक्रिया)

  • Emergency On-Call Officer आपदा की घटनाओं का विश्लेषण करता है और सम्बंधित Space Agency से संपर्क करता है.
  • आपदा की satellite image को emergency basis पर प्राप्त किया जाता है.
  • एक Project manager ; जानकारी इक्कठा करने के लिये satellite image को process करता है.
  • Finally; उस आपदा के वास्तविक कारणों की जानकारी तुरंत मिल जाती है.

ISRO ने इसी प्रक्रिया के माध्यम से अमेरिका की प्राइवेट सेटेलाइट कम्पनी “Planet Lebs” की सेटेलाइट इमेज का प्रयोग किया था.

International Charter की आवश्यकता

अभी तक ऐसी कोई भी अन्तरिक्ष एजेंसी नहीं है; जिसका सेटेलाइट नेटवर्क पूरी दुनिया को एक साथ और हर समय आंकड़े उपलब्ध करवा सके.

हालाँकि इस दिशा में U.S.A. की प्राइवेट अन्तरिक्ष एजेंसी SpaceX ; अन्तरिक्ष में सेटेलाइट का नेटवर्क तैयार कर रही है. जो पूरी दुनिया को एक साथ कवर कर सके. परन्तु अभी इसमें समय है.

Uttarakhand में International Charter की भूमिका

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित त्रिशूल पर्वत शिखर पर दिनांक 07/02/2021 को भारी मात्रा में हिमस्खलन हुआ. जिस कारण ऋषि गंगा में अचानक बाड़ आने से लगभग 200 लोग लापता हो गये.

शुरुआत में इसे नंदा देवी पर्वत शिखर पर ग्लेशियर टूटने की घटना माना गया था.

परन्तु ISRO द्वारा International Charter को लागू करने के बाद पता चला कि यह घटना नंदा देवी पर्वत शिखर की नहीं थी.

इस चार्टर के कारण; “Planet Lebs” की सेटेलाइट इमेज के प्रयोग से पता चला कि, यह हिमस्खलन, त्रिशूल पर्वत से शुरू हुआ था. वहां पर; 02 से 05 फरवरी के बीच, भारी बर्फबारी हुई थी. जिस कारण; ताज़ी बर्फ के इस क्षेत्र में, लगभग 14 वर्ग किमी क्षेत्र में भारी हिमस्खलन हुआ. इससे; ऋषि गंगा में अचानक बाड़ आने से, बाँध परियोजना क्षेत्र और कर्मचारियों को भारी नुकसान हुआ.

निष्कर्ष

International Charter; न केवल आपदा जैसी विषम परिस्थितियों में आपातकालीन मदद करता है. बल्कि; पारस्परिक सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को भी मधुर बनाता है. 2004 में भी हिन्द महासागर में आये भूकंप और उससे उत्पन्न सुनामी के समय भी यह चार्टर लागू हुआ था.

मुझे पूरी उम्मीद है कि ; इस आर्टिकल के माध्यम से आपको कई नवीन जानकारी प्राप्त हुई होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे तो Please इसे Like करें. अगर आपको इससे related किसी अन्य आर्टिकल के बारे में जानकारी चाहिये, तो मुझे नीचे कमेंट करके लिखें . और इसे अपने दोस्तों के साथ share करें. Thank You

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Top F&Q For International Charter Space and Major Disasters

International Charter Space and Major Disasters क्या है?

यह चार्टर; विश्व के space agencies के बीच, अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर किया गया एक समझौता है. जिसमें यह सदस्य देशों के मध्य किसी भी आपदा या आपातकालीन परिस्थितियों में सेटेलाइट आंकड़ों को निशुल्क आदान प्रदान करेंगे.

International Charter Space and Major Disasters की स्थापना कब हुई?

इसका अस्तित्व जुलाई 1999 में ऑस्ट्रिया के वियाना में आयोजित UNISPACE -III सम्मलेन में सामने आया. यह सम्मलेन European Space Agency तथा French Space Agency ने आयोजित किया था.
परन्तु; यह चार्टर नवम्बर 2000 से औपचारिक रूप से लागू हुआ.

International Charter Space and Major Disasters के सदस्य देश कौन कौन हैं?

. केवल वही संस्थाएं इस चार्टर के सदस्य होंगे; जो पृथ्वी के संसाधनों के सेटेलाइट आंकड़ों का संग्रह करते हैं. इस आधार पर; इस चार्टर के केवल 17 सदस्य (ISRO सहित) हैं. जबकि पूरे विश्व में 72 सरकारी तथा अन्य प्राइवेट अन्तरिक्ष संस्थाएं कार्य कर रही हैं.
. ये सभी सदस्य स्वैछिक आधार पर आपस में सहयोग करते हैं. ऐसा करने के लिए ये किसी भी प्रकार से बाध्य नहीं हैं.
. UNOOSA / UN – SPIDER और UNITAR / UNOSAT इसके औपचारिक सदस्य नहीं हैं. परन्तु; UN एजेंसीज की तरफ से इन्हें यह अधिकार है कि, आपातकाल में यह चार्टर को लागू कर सकती है.

Summary
International Charter Space and Major Disasters
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International Charter Space and Major Disasters
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यह आर्टिकल बताता है कि International Charter किस प्रकार आपातकाल में अन्य देशों की मदद करता है? आपदा के कारणों को जानने के लिए सेटेलाइट आंकड़ों का प्रयोग किया जाता है और कम समय में अधिक से अधिक सही और विश्वशनीय जानकारी को प्राप्त किया जाता है.
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GEO FACTS

This Post Has 4 Comments

  1. Dr.Richa Gahlaut

    This is the fact, I was not aware. Please do share more blogs related to earthquake.

    1. Anonymous

      Ok ma’am. I’ll catch up soon over this topic.

  2. Dr Sharad Visht

    Very informative, Dr Ashutosh, is there any method to predict landslide or avalanches. Can you suggest any book for beginner to understand rocks. Thank you.

    1. Anonymous

      Thank you so much sir. I will suggest you the list of books

      Physical Geology – Mukherjee Geo Dynamic
      Evolution of India – K.S. Valdia
      Principles of Physical Geology – Arthur Holmes

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