क्या Ladakh के खजानों पर है China की नजर!

क्या Ladakh के खजानों पर है China की नजर!

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इस आर्टिकल में उन कारणों पर चर्चा की गयी है; जिसके कारण चीन, Ladakh में, बार-बार घुसपैठ करता रहता है . चीन ने पिछले कुछ सालों में; Ladakh में, अपनी गतिविधियाँ बड़ा दी हैं. विशेषज्ञों के अनुसार; Ladakh में पर्याप्त मात्रा में, यूरेनियम और सोने के भंडारों का पता चला है. जिस कारण; चीन की चोर भरी निगाहें, इन भंडारों को लूटने की है. चीन; आज स्वयं को, विश्व शक्ति के रूप में देखता है. तो क्या ; विश्व शक्ति बनने के लिए , चीन को Ladakh के इन बेशकीमती खजानों की आवश्यकता है. आइये जानते हैं –

  • 28 जुलाई 2014  — Ladakh के डेमचाॅक में चीनी सैनिकों की घुसपैठ। 
  • 15 अगस्त 2017 — Ladakh  के पैंगोंग झील के पास फिंगर 4 और फिंगर 5 में चीनी सैनिकों ने की घुसपैठ
  • 9 मार्च 2018 –Ladakh  के पैंगोंग झील के पास चीनी सैनिकों की घुसपैठ
  • 15 जून 2020  — हद ही मचा दी,,,,,, क्रूरता पूर्ण व्यवहार ! शांति वार्ता  के लिए गये भारतीय जवानों पर धोखे से प्रहार। 

मतलब ये क्या है ? क्या लदाख में ब्रेकिंग न्यूज का चीन के साथ कोई कान्ट्रैक्ट साइन हुआ है? जो वो हर बार किसी न किसी रूप में लदाख में अपनी उलूल जुलूल हरकतें करता रहता है।

लदाख में बार बार घुसपैठ

Ladakh में चीन बार बार घुसपैठ की हरकतें करता है. क्या इन हरकतों का आधार वही पंचशील सिद्वान्त हैं? जिनको आधार मानते हुए 29 अप्रैल 1954 को भारत और चीन के मध्य तिब्बत संधि की गई थी? 😠😠 जिसमें “हत्या न करना “, “झूठ न बोलना “ और “व्यभिचार न करना “ जैसे महान विचार शामिल थे। 

इन सिद्वान्तों का अगर; एक भी गुण, चीन के तथाकथित शक्तिशाली नेताओं के पास होता. तो शायद; वो कभी ऐसी हरकतों के बारे में, सोचते तक नहीं। शीघ्र अतिशीघ्र; विश्व शक्ति बनने की अपनी परम लालसा में उसने नैतिकता, मानवता, यहां तक कि अपनी गरिमा को भी बेच दिया।

वो यह भूल गया कि; विश्व शक्ति में शक्ति का सम्बन्ध, केवल ताकत से नहीं होता. उस शक्ति में होता है – परम धैर्य और बड़प्पन. मानवता के लिए त्याग और समर्पण ; तथा विश्व में अमन और चैन कायम रखने का गुण। अगर ताकत ही शक्तिशाली होने का पैमाना होता! तो क्या ओसामा बिन लादेन और सददाम हुसैन जैसे क्रूर और आंतकी लोग पर्याप्त न थे? 

परन्तु बड़प्पनवो गुण है, जो पद से नहीं, संस्कारों से प्राप्त होता है। 

और  चीन के संस्कार !!!

  • शांति वार्ता के बाद; हमारे वीर कर्नल संतोष बाबू, हवलदार पलानी और सिपाही कुंदन ओझा जी पर धोखे से नुकीले हथियारों से वार।
  • क्या इसे कहते हैं शांति वार्ता?    जिसमें पूरी बटैलियन शामिल हो, यानि कि 600 – 700 सैनिक।

यही है चीन के संस्कार; और यही वे उसके आदर्श पंचशील सिद्वान्त, जिन्हें वह मानता आया है। चाहे; वह 15 जून 2020 की बात हो, या 20 अक्टूबर 1962 का दिन. “हिन्दी चीनी भाई भाई” के नारे की ओट में उसने जो विश्वास घात किया है; उसने “पीठ में छुरा घोंपने” को, “चीन की नीतियों का पर्यायवाची” बना दिया है। 

लदाख में घुसपैठ के कारण

आइये जानते हैं, आखिर किन कारणों की वजह से चीन बार बार Ladakh में घुसपैठ की योजना बनाता है।

लदाख के संसाधन

Department of Geology and Mining J&K के अनुसार; लेह और लदाख  में Limestone, Marble, Granite और Borax के सुरक्षित भण्डार पर्याप्त हैं. जिनकी; कुल संभावित मात्रा, 20 मिलिटन टन के आसपास है। 

  तो क्या चीन सिर्फ इन खनिजों के लिए इतनी मशक्कत कर रहा है। 🥱          गलत 

    Actually लदाख में यूरेनियम के पर्याप्त भण्डार मौजूद हैं। जी हां  –   यूरेनियम।

लदाख में यूरेनियम के भंडार

2007 में जर्मनी की प्रयोगशाला में इस बात की जानकारी मिली है. यहाँ प्रयोगशाला में; चट्टानों के अध्ययन से पता चला है कि, यहां की चट्टानों में, 5.36 % यूरेनियम है. यह पूरे देश में; अन्य सभी स्थानों पर मिले यूरेनियम से, काफी अधिक है।

भूगर्भ विज्ञानियों का मानना है कि; “यहां की यूरेनियम की चट्टानें ,अन्य स्थानों की तुलना में अपेक्षाकृत नयी है. जो कि, 100 से 25 मिलियन साल पुरानी है. जबकि ;भारत में यूरेनियम की चट्टानें , आन्ध्र प्रदेश, छतीसगढ़ और झारखण्ड में पायी जाती है. जो कि, 2500 से 3000 मिलियन साल पुरानी है.”

 उत्तराखण्ड की कुमाऊं यूनिवर्सिटी के भू वैज्ञानिकों ने; Ladakh के उत्तर में नुब्रा श्योक घाटी में, उच्च सांद्रता वाले यूरेनियम और थोरियम के भंडार का पता लगया है.

कुंमाऊ विश्वविद्यालय के भू वैज्ञानिकों ने; Current Science पत्रिका के नवीनतम अंक में इस बात की जानकारी दी है. उन्होंने कहा है कि; यहां पर शुरूआती जांच से पता चला है कि, यहां दानेदार हरे रंग का जिरकोन बहुतायत में है। 

यूरेनियम की विशेषता

“यूरेनियम एक रेडियो सक्रिय पदार्थ होता है. किसी भी रेडियो सक्रिय पदार्थ की; सबसे महत्वपूर्ण विशेषता, उसका अर्ध आयुकाल होती है। यूरेनियम का अर्ध आयुकाल सवा लाख साल का माना गया है।”

अर्थात; यदि किसी के पास, वर्तमान में 1 किलोग्राम यूरेनियम है. तो वह; सवा लाख साल बाद, आधा किलो का रहेगा। तब तक आप इससे ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

यही कारण है कि; यूरेनियम के समस्थानिक का प्रयोग, चट्टानों की आयु प्राप्त करने के लिए किया जाता है. क्योंकि; इसका अर्ध आयुकाल, बहुत ज्यादा होता है।

यूरेनियम का प्रयोग;परमाणु बम बनाने के साथ साथ, परमाणु बिजली संयत्रों में बिजली बनाने के लिए भी किया जाता है।

आपको बताते चलें कि; यूरेनियम 235, पृथ्वी के धरातल पर मात्र 0.7 प्रतिशत मिलता है. जिसे; प्रयोगशाला में 3 प्रतिशत के स्तर तक प्राप्त करके, बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।

“यूरेनियम को 3 प्रतिशत के स्तर तक ले जाने प्रक्रिया को यूरेनियम संवर्धन कहते हैं.”

परमाणु बिजली संयत्रों में इसी सवंद्र्वित यूरेनियम का प्रयोग करते हैं।

लेकिन अगर आपको लगता है कि चीन इस यूरेनियम का प्रयोग बिजली बनाने में करेगा, तो आप गलत हैं।

चीन को महाशक्ति बनने के लिए; अपने परमाणु बमों की संख्या को 260 से बढ़ाकर, 1000 तक करने की योजना है। जाहिर सी बात है; अपने प्रतिष्ठित चिर प्रतिद्वन्दी, अमेरिका को पछाड़ने के लिए उसे इतनी ही संख्या चाहिऐ।  

इन्हें भी देखिये 
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लदाख में सोने का भंडार

वर्तमान समय में; Ladakh की गलवान घाटी में, जहां पर विवाद चल रहा है. उसके ठीक बगल में; गोगरा पोस्ट  के पास, सोने के भंडारों का अनुमान है। इससे पहले; चीन को, अरूणाचल प्रदेश के नजदीक से, काफी मात्रा में सोना, चांदी और रेअर अर्थ मिला है. जिसकी; अनुमानित लागत, 60 अरब डाॅलर है. इसे निकालने के लिए; उसने सड़कों, रेलमार्गों और हवाई यातायात का जाल बिछा दिया है। 

अभी यह सिर्फ अनुमान है. क्योंकि; विवादित जगह होने के कारण, अभी तक पर्याप्त सर्वे नहीं हो पाया है। लेकिन; अगर इस क्षेत्र को, चीन ने हड़प लिया. तो सर्वे क्या चीज है दोस्तों; 😏 वह तो, पाताल के खजाने तक का रास्ता बना देगा। ऐसी फितरत है उसकी। 

लदाख का पर्यटन

Ladakh, जनसंख्या की दृष्टि से भले ही वीरान हो. परन्तु माशाअल्लाह! कुदरत ने जो नूर; इस जमीं पे बिखेरा है, वह काबिले तारीफ है। लद्दाख; एक ऊंचा पठार है, जिसका ज्यादातर हिस्सा, 3000 मीटर के आसपास है. यहां; बेहद खूबसूरत झीलें हैं, वीरान सुनसान पहाड़ हैं, जो प्रकृति प्रेमियों को बरबस, अपनी ओर आकर्षित करते हैं। 

अगर; इसे भारत के मिनी स्विटजरलैण्ड कहा जाये, तो कोई अतिसंयोक्ति नहीं होगी। जैसे; स्विटजरलैण्ड, पर्यटन के मामले में, आज विश्व में अग्रणी है. और; अपनी कुल जी.डी.पी. में, 8.5 % का योगदान देता है।  उसी प्रकार; लद्दाख का यह क्षेत्र भी, पर्यटन से काफी आजीविका प्राप्त कर सकता है। 

लद्दाख की खूबसूरती से मुहब्बत न हो, ऐसा हो नही सकता,,,, क्योकि

मोहब्बत तो बस एक एहसास है,,,

जिससे हो जाये, बस वही सबसे खास है।।

लेकिन …. चीन और मोहब्ब्त!

दोनो ऐसे हैं; जैसे “चन्दन के पेड़ पर लिपटे सांप. चीन की मोहब्बत को; नरेश कुमार शाद  जी की पंक्तियों से, आसानी से समझा जा सकता है – 

मुझ को एहसास है, लेकिन तुझे एहसास नहीं ।

तेरे दामन की हवा, मेरे लिए रास नहीं।।

निष्कर्ष

दोस्तों। मुझे उम्मीद है कि; चीन की षडयन्त्रकारी सोच को, मैने इस छोटे से Blog के माध्यम से, समझाने की कोशिश की है। हांलाकि; ये पर्याप्त नहीं है। क्योंकि; वो चीन, ड्रैगन नहीं, सांप है सांप ! जिसे , अपने ही बच्चों को खाने की आदत है. शब्दों की; मर्यादाओं की सीमाओं को, मैनें बहुत बार लांघा है. इसके लिए मैं माफ़ी मांगता हूँ।

Top FAQ for Ladakh के खजानों पर China की नजर!

चीन के लदाख में घुसने के क्या कारण हैं?

लदाख में पर्याप्त मात्रा में यूरेनियम और सोने के भंडार होने का अनुमान है. जिस कारण चीन की नजर इन खजानों पर है. जर्मनी के वैज्ञानिकों और उत्तराखंड के भू गर्भ शास्त्रियों ने लदाख में पर्याप्त मात्रा में यूरेनियम के भंडारों का पता लगाया है.

यूरेनियम का प्रयोग किस लिए किया जाता है?

यूरेनियम एक रेडियोसक्रिय पदार्थ होता है. जिसका उपयोग परमाणु बम बनाने में किया जाता है. इसके अलावा यूरेनियम से बिजली भी बनाई जाती है. परमाणु बिजली संयंत्रो की सहायता से ऐसा किया जाता है.

संवर्धित यूरेनियम किसे कहते हैं?

यूरेनियम प्राकृतिक अवस्था में मात्र 0.7 % मिलता है. जिसे प्रयोगशाला में ले जाकर 3 % के स्तर तक ले जाते हैं. यूरेनियम को 0.7% से 3 % तक के स्तर तक ले जाने की प्रक्रिया को ही यूरेनियम का संवर्धन कहते हैं.

क्या लदाख में सोने के भंडार मिले हैं?

लदाख की गलवान घाटी के पास गोगरा पोस्ट के नजदीक वैज्ञानिकों को सोने के भंडारों के होने का संदेह है. अभी ये जगह विवादित होने के कारण यहाँ का पर्याप्त सर्वे नहीं हो पाया है.

मुझे पूरी उम्मीद है कि; इस आर्टिकल के माध्यम से आपको काफी नयी जानकारी मिली होगी. यह आर्टिकल आपको कैसे लगा ? Please नीचे comment box में comment करके बताएं. Please इस आर्टिकल को Like 👍 करें. इसे अपने दोस्तों के साथ Share करें.

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This Post Has 2 Comments

  1. Anonymous

    V interesting information

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