क्या उत्तराखंड आपदा का सम्बन्ध नंदा देवी पर्वत पर खोये हुए रेडियो एक्टिव पदार्थ –  “प्लूटोनियम” से है ?

क्या उत्तराखंड आपदा का सम्बन्ध नंदा देवी पर्वत पर खोये हुए रेडियो एक्टिव पदार्थ – “प्लूटोनियम” से है ?

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उत्तराखंड में नंदा देवी पर्वत शिखर के पास भारी हिमस्खलन होने के कारण समीपवर्ती क्षेत्र में काफी अधिक नुकसान हुआ है. भूगर्भ वेता इसे प्राकृतिक घटना मान रहे हैं. परन्तु क्या यह वाकई में प्राकृतिक है? या कुछ और ? 60 के दशक में अमेरिका की C.I.A. और भारत की I.B. ने, नंदा देवी पर्वत शिखर (उत्तराखंड) पर, एक खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया था. जिसका नाम था – “Operation Hat”. इस; Operation Hat का मिशन था – “चीन के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करना.” परन्तु इस मिशन को पूरा करने के दौरान; रेडियो एक्टिव पदार्थ – “प्लूटोनियम “, नंदा देवी पर्वत पर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया. क्या चीन को इस “Operation Hat” की भनक लग गयी थी? या अमेरिका ने जानबूझ कर ऐसा किया? और सबसे बड़ा सवाल – क्या इसी प्लूटोनियम से यह वृहद् हिमस्खलन हुआ ? आइये जानते हैं –

“उत्तराखंड के त्रिशूल पर्वत पर दिनांक 07/02/2021 को भारी हिमस्खलन हुआ; जिस कारण ऋषि गंगा में अचानक बाड़ आने से , 200 से अधिक लोग लापता हो गए. “

Operation Hat है क्या ?

ऑपरेशन हैट; एक बहुत खतरनाक जासूसी प्रोग्राम था. जिसे उत्तराखंड के नंदा देवी पर्वत शिखर पर अमेरिका की ख़ूफ़िया एजेंसी C.I.A. (Central Intelligence Agency) और भारत की I.B. (Intelligence Bureau) ने मिलकर, एक साथ अंजाम दिया है.

इस ऑपरेशन में नंदा देवी पर्वत शिखर पर; एक ऐसा उपकरण लगाया गया, जो चीन में होने वाली परमाणु परीक्षण की गतिविधियों पर नजर रख सके. परन्तु; इस उपकरण में खतरनाक रेडियो एक्टिव पदार्थ “प्लूटोनियम” का प्रयोग किया गया था. जो कि; रहस्यमय तरीके से, गायब हो गया था.  😨

इस Operation की जरुरत क्यों पड़ी ?

अमेरिकी खूफिया एजेंसी को यह शक था कि; चीन अपने पश्चिमी भाग में, परमाणु परीक्षण कर रहा है.  वास्तव में ! चीन ने अपना पहला परमाणु परीक्षण; 1964 में, Xinjiang प्रान्त में किया था. अतः चीन के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी को; हासिल करना, उसका प्रथम उदेशय था.

उस समय तक high resolution वाले; satellite camera, उपलब्ध नहीं थे. इसीलिए; एक ऐसे ऊँचे स्थान की आवश्यकता थी, जहाँ से चीन के घटना क्रम पर, नजर रखी जा सके.

हालाँकि; माऊंट एवरेस्ट तथा कंचनजंघा के शिखरों से, इस घटना पर नजर रखी जा सकती थी. परन्तु; ये दोनों स्थान, नेपाल से जुड़े हुए हैं. जहां; चीनी जासूस, कभी भी आ सकते थे. इसीलिए finally नंदा देवी पर्वत शिखर को चुना गया.

लेकिन नंदा देवी पर्वत को ही क्यों ?

नंदा देवी पर्वत को चुनने के पीछे ये निम्न कारण थे –

  • यह चोटी पूरी तरह से भारत की सीमा के अंदर है. 
  • नंदा देवी पर्वत भारत की दूसरी सबसे ऊँची चोटी (7817 मी0) है और उत्तराखंड राज्य में स्थित है.
  • यहाँ से बिना किसी रुकावट के चीन के पश्चिमी भू भाग पर नजर रखी जा सकती थी. 
"The target of Operation Hat"
“नंदा देवी पर्वत और Xinjiyang प्रान्त की location”

परन्तु भारत ने इस मिशन के लिए हामी क्यों दी ?

हालाँकि भारत कभी भी ऐसे खतरनाक मिशन के लिए हाँ नहीं करता, लेकिन

  • भारत 1962 में चीन के धोखे से नाराज था.
  • साथ ही; वह नहीं चाहता था कि, चीन एक परमाणु संपन्न देश बने. क्यूंकि; यह बहुत कुछ एक बन्दर के हाथ में, बन्दूक थमा देने जैसा था.
इन्हें भी देखिये 
नंदा देवी पर्वत पर हिमस्खलन में अमेरिकी सेटेलाइट ने की मदद 
ओजोन परत का छेद स्वयं ठीक हो सकता है?

अब शुरू होता है नंदा देवी पर्वत पर खूफिया मिशन – “Operation Hat”

नंदा देवी पर्वत; यूँ तो भारत की दूसरी, सबसे ऊँची चोटी है. परन्तु; पर्वतारोहण के मामले में, यह दुनिया की सबसे खतरनाक शिखरों में से एक है.

1934 तक तो इसकी चढाई का रास्ता भी नहीं मालूम था.

नंदा देवी की चढाई कितनी खतरनाक है ! इसका अंदाजा आप; तेनजिंक नोर्गे (प्रथम माउंट एवरेस्ट आरोही) की आत्मकथा, ‘टाइगर ऑफ़ द स्नोज‘ में लिखे, उनके अनुभव से लगा सकते हैं –

“हाल के वर्षों में लोग ; जब मुझसे पूछते हैं कि, आपकी अभी तक की सबसे मुश्किल और खतरनाक चढ़ाई कौन सी है ? तो उनके मन में ; यह उम्मीद रहती है कि, मैं माउंट एवरेस्ट का नाम लूंगा. लेकिन ;यह एवरेस्ट नहीं है, यह तो नंदा देवी ईस्ट है !” 

तेनजिंक नोर्गे
"Nanda Devi Peak: The place of Operation Hat"
“नंदा देवी पर्वत शिखर”

इस मिशन के लिए; अमेरिका ने, अपने विश्वस्तरीय पर्वतारोही भेजे. जबकि; भारत ने, 1962 में, माउंट एवरेस्ट पर चढाई करने वाले, पर्वतारोहियों का दल भेजा. दोनों देशों की टीम ने; साथ में काम किया. जिसका नेतृत्व, कैप्टेनमनमोहन सिंह कोहली ने किया.

Operation Hat का मिशन था –

  • नंदा देवी पर्वत के शिखर पर; Nuclear Powered Telemetry Relay Listening उपकरण को रखना, यह उपकरण 56 किलो ग्राम वजनी था.
  • साथ में थे 8 से 10 फ़ीट के एंटीना.
  • 02 Transceivers Sets.
  • एक SNAP (System For Nuclear Auxiliary Power) जनरेटर. यह जनरेटर; कुछ सालों तक, इस उपकरण को ऊर्जा प्रदान करने के लिए था. 
  • और साथ में था उपकरण का ईंधन — 07 प्लूटोनियम कैप्सूल्स. 😱😱

प्लूटोनियम एक रेडियो एक्टिव पदार्थ होता है. नागासाकी पर 1945 में डाले गए परमाणु बम का नाभिक प्लूटोनियम का था.”

इस मिशन पर; हिरोशिमा में डाले गए परमाणु बम के, आधे के बराबर, प्लूटोनियम लाया गया था. जो ;अपने आप में ,एक भयानक घटना थी. 🤒🤒

Operation Hat के लिए नंदा देवी पर्वत की पहली असफल चढ़ाई

18 अक्टूबर 1965 को कैप्टेन मनमोहन सिंह कोहली के नेतृत्व में नंदा देवी पर्वत शिखर की चढाई प्रारम्भ की गयी.

चढ़ाई के दौरान; जेनरेटर से रेडियो एक्टिव पदार्थ के कारण, ऊष्मा निकल रही थी. जिस कारण; वह काफी अधिक, गर्मी दे रहा था. इसलिए; इसे ले जा रहे शेरपाओं ने, इसे Guru Rinpoche (Buddhist God) नाम दिया.

जब इनकी टीम; 24 हजार की फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित, कैंप 4 तक पहुंची. उसी समय; भयानक बर्फीला तूफ़ान आने से, कैप्टेन मनमोहन सिंह कोहली के सामने दो ही रास्ते थे — “टीम या मिशन”.

Finally; उन्होंने, टीम को चुना. और वो सारा सामान; उस प्लूटोनियम के साथ, वही पर रख कर वापिस आ गए थे. ये सोचकर कि; अगली बार दोबारा आकर, इसे ऊपर तक पहुंचाएंगे.

दूसरी चढ़ाई और प्लूटोनियम गायब !!

अगले साल 1966 में; जब कैप्टेन मनमोहन सिंह कोहली की टीम, वापिस उस स्थान पर आयी. तो वहां से; वो प्लूटोनियम का कैप्सूल, गायब था. 😲😲 अमेरिका को शक हुआ कि; कहीं भारत ने उस कैप्सूल को चोरी कर, परमाणु कार्यक्रम में प्रयोग तो नहीं कर लिया ? परन्तु ऐसा नहीं था. उस पूरे वर्ष; उस कैप्सूल की खोज की गयी, लेकिन वह नहीं मिला.

नंदा देवी पर्वत की तीसरी सफल चढ़ाई

फिर 1967 में; कैप्टेन मनमोहन सिंह कोहली के नेतृत्व में, दूसरा मिशन शुरू किया गया. इस बार नंदा देवी के पास; नंदा कोट शिखर (22510 फ़ीट) पर, दूसरा Nuclear Powered Listening उपकरण को सफलता पूर्वक लगाया गया. परन्तु; कुछ महीनो बाद, इसने भी काम करना बंद कर दिया था.

नंदा देवी की अंतिम चढ़ाई और प्लूटोनियम फिर गायब

1968 में; जब टीम नंदा कोट पर गयी, तो वहां भी कोई मशीन नहीं थी. 😵😵 परन्तु; इस बार वह मशीन, काफी अधिक गहराई में धंस गयी थी.  उसने; बर्फ में 8 फ़ीट चौड़ी सुरंग बना दी थी, जिसे वह टीम अपने साथ वापस ले आयी.

बाद में ; 1977 में , इस खूफिया मिशन के बारे में पूरी दुनिया को पता चला. जब ; Outside Magazine में , इसके विषय में प्रकाशन हुआ था.

निष्कर्ष

तो ये था OPERATION HAT!     पर ये मिशन अपने साथ कई सवालो को छोड़ गया –

  • आखिर उस प्लूटोनियम के कैप्सूल के साथ क्या हुआ ? वह कहाँ गया?
  • क्या; वो भी, पर्याप्त गहराई में धंस गया था? या किसी एवलॉन्च के कारण नीचे धंस गया था. लेकिन क्या वो आज भी वही है?
  • यदि हाँ, तो उसे बहार निकालने के प्रयास किये जाने चाहिए. क्योंकि; प्लूटोनियम जैसा रेडियो एक्टिव पदार्थ, लाखों करोड़ो साल तक ऊर्जा दे सकता है.
  • क्या भारत सरकार को; ऐसे मिशन में साथ देना चाहिए था? जबकि; नंदा देवी से निकलने वाली ऋषि गंगा, सम्पूर्ण मध्य भारत से होते हुए; पश्चिम बंगाल में, समुद्र से मिलती है. यदि इस प्लूटोनियम से; विकिरण लीक होता है, तो वो भारत के उत्तर से लेकर पश्चिम बंगाल तक को प्रभावित कर सकता है.

आपदा की वास्तविकता

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित त्रिशूल पर्वत शिखर पर दिनांक 07/02/2021 को भारी मात्रा में हिमस्खलन हुआ. जिस कारण ऋषि गंगा में अचानक बाड़ आने से लगभग 200 लोग लापता हो गये.

शुरुआत में इसे नंदा देवी पर्वत शिखर पर ग्लेशियर टूटने की घटना माना गया था.

परन्तु ISRO द्वारा International Charter को लागू करने के बाद पता चला कि यह घटना नंदा देवी पर्वत शिखर की नहीं थी.

इस चार्टर के कारण; “Planet Lebs” की सेटेलाइट इमेज के प्रयोग से पता चला कि, यह हिमस्खलन, त्रिशूल पर्वत से शुरू हुआ था. वहां पर; 02 से 05 फरवरी के बीच, भारी बर्फबारी हुई थी. जिस कारण; ताज़ी बर्फ के इस क्षेत्र में, लगभग 14 वर्ग किमी क्षेत्र में भारी हिमस्खलन हुआ. इससे; ऋषि गंगा में अचानक बाड़ आने से, बाँध परियोजना क्षेत्र और कर्मचारियों को भारी नुकसान हुआ.

मुझे पूरी उम्मीद है कि ; इस आर्टिकल के माध्यम से आपको कई नवीन जानकारी प्राप्त हुई होगी. अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगे तो Please इसे Like करें. अगर आपको इससे related किसी अन्य आर्टिकल के बारे में जानकारी चाहिये, तो मुझे नीचे कमेंट करके लिखें . और इसे अपने दोस्तों के साथ share करें. Thank You

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Operation Hat क्या है ?

ऑपरेशन हैट; एक बहुत खतरनाक जासूसी प्रोग्राम था. जिसे उत्तराखंड के नंदा देवी पर्वत शिखर पर अमेरिका की ख़ूफ़िया एजेंसी C.I.A. (Central Intelligence Agency) और भारत की I.B. (Intelligence Bureau) ने मिलकर, एक साथ अंजाम दिया है.
इस ऑपरेशन में नंदा देवी पर्वत शिखर पर; एक ऐसा उपकरण लगाया गया, जो चीन में होने वाली परमाणु परीक्षण की गतिविधियों पर नजर रख सके. परन्तु; इस उपकरण में खतरनाक रेडियो एक्टिव पदार्थ “प्लूटोनियम” का प्रयोग किया गया था. जो कि; रहस्यमय तरीके से, गायब हो गया था. 

नंदा देवी पर्वत की ऊंचाई कितनी है ?

नंदा देवी पर्वत की ऊंचाई 7817 मी है.

Operation Hat का मिशन क्या था ?

नंदा देवी पर्वत के शिखर पर; Nuclear Powered Telemetry Relay Listening उपकरण को रखना, यह उपकरण 56 किलो ग्राम वजनी था.
साथ में थे 8 से 10 फ़ीट के एंटीना.
02 Transceivers Sets.
एक SNAP (System For Nuclear Auxiliary Power) जनरेटर. यह जनरेटर; कुछ सालों तक, इस उपकरण को ऊर्जा प्रदान करने के लिए था. 
और साथ में था उपकरण का ईंधन — 07 प्लूटोनियम कैप्सूल्स.

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क्या उत्तराखंड आपदा का सम्बन्ध नंदा देवी पर्वत पर खोये हुए रेडियो एक्टिव पदार्थ -  "प्लूटोनियम" से है ?
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उत्तराखंड में नंदा देवी पर्वत शिखर के पास भारी हिमस्खलन होने के कारण समीपवर्ती क्षेत्र में काफी अधिक नुकसान हुआ है. भूगर्भ वेता इसे प्राकृतिक घटना मान रहे हैं. परन्तु क्या यह वाकई में प्राकृतिक है? या कुछ और ? क्यूंकि 60 के दशक में अमेरिका की C.I.A. और भारत की I.B. ने, नंदा देवी पर्वत शिखर (उत्तराखंड) पर, एक खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया था. जिसका नाम था - "Operation Hat". इस; Operation Hat का मिशन था - "चीन के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करना." परन्तु इस मिशन को पूरा करने के दौरान; रेडियो एक्टिव पदार्थ - "प्लूटोनियम ", नंदा देवी पर्वत पर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया. क्या चीन को इस "Operation Hat" की भनक लग गयी थी? या अमेरिका ने जानबूझ कर ऐसा किया? और सबसे बड़ा सवाल - क्या इसी प्लूटोनियम से यह वृहद् हिमस्खलन हुआ ?
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GEO FACTS

This Post Has 4 Comments

  1. RENU SANWAL

    सर ,आपके सभी ब्लॉग में बहुत अच्छी जानकारी होती है।

  2. RENU SANWAL

    सर, आपके सारे ब्लॉग में बहुत ही अच्छी जानकारी होती है।

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